इंतजार-ए-इश्क

इंतजार-ए-इश्क

जरा रुक भी जाओ ,मेरी बात तो सुनो श्वेता अब कभी तंग नही करूँगा तुम्हे.......बस आखिरी बार । समीर स्ट्रैचर पकड़े रोये जा रहा था और डॉक्टर की टीम श्वेता को ऑपरेशन थियेटर मे ले गई । समीर ,उसकी मम्मा पापा श्वेता के माँ,पापा सब बाहर खड़े श्वेता की जिंदगी की दुआ कर रहे थे । सब साहिल से नाराज थे क्योंकि उसकी नादानियों की वजह से आज एक साफ़ दिल लड़की की जिंदगी पर बन आई थी। समीर ने कभी सपने में भी नही सोंचा था कि वाकई कोई उसे इतना प्यार करता है कि उसकी गलतियों की सजा वह खुद को देगा और पिछला समय एक लम्हे  की  तरह उसकी आँखो के सामने घूम गया।
     
अभी दो दिन पहले की ही बात है जब श्वेता उससे बात करने आई थी कि या तो वह अपनी आजाद पंछी की तरह उड़ने की आदतें छोड दे नही तो वह उसे छोड़ देगी।समीर को लगा हमेशा ही ऐसे ही बोलती है  ये .....कॉलेज से जानता हूँ,जब से हांथ थामा है,,, कभी नही छोड़ा। बस आखिरी बार ये ग्रुप ज्वाइन कर कॉन्सर्ट कर लूँ उसके बाद पापा का बिजनैस ज्वाइन कर लूँगा। साहिल मनमौजी स्वभाव का हैंडसम नौजवां  था । पहली बार श्वेता उसका गाना सुनकर ही उस पर फिदा हुई थी।फिर कॉलेज की दोस्ती और कभी न मिटने वाला उसका एकतरफा प्यार। पिछली नौ तारिख को पूरे पैंतिस साल की हो गई थी।  इश्क का जुनून इतना था  कि इतने प्रपोज आने के बाद और श्वेता से डॉक्टर श्वेता बनने के बाद भी साहिल के प्रति उसके इश्क में कभी कोई अंतर नही आया।समीर लहर की तरह था ,वह बहना चाहता था।उड़ना चाहता था स्वच्छन्द आकाश में यहाँ वहाँ चारो दिशाओं में।कभी थक हार के जमीं पर उतरता तो बस श्वेता नाम का घरौंदा तलाशता क्योंकि उसे अच्छे से पता था कि ये घरौंदा कभी उसे भूखा प्यासा नही छोड़ेगा क्योंकि यहाँ प्यार बसता  है ,सच्चा इश्क ।समीर के पापा का बिजनैस बहुत अच्छे से स्टैब्लिश था इसलिये इकॉनिमकली सब कुछ स्ट्रांग  होने के बावजूद भी श्वेता के पैरेन्टस चाहते थे कि श्वेता अब डिशीजन ले ले ।पूरे पन्द्रह साल हो गये थे उन्हे इंतजार करते करते। कॉलेज से निकलने के बाद भी समीर ने श्वेता को कहा था कि वह बहुत अलग है उसकी रफ्तार और मंजिल निश्चित नही! पर कहते हैं न दिल भी एक ही बार लगता है बाकि तो सब समझौते होते हैं।श्वेता इंतजार करती रही उस पल का जब समीर उसकी मांग भरेगा।

अबकी बार जब समीर इंडिया आया तो श्वेता ने उससे डिशीजन लेने को कहा।चाहत तो उसकी भी थी पर बस.... शायद थमना नही चाहता था और जब इंसान को पता हो ये मंजिल मेरी है ,इसे तो मैं पा ही लूंगा तो वह बेपरवाह भी हो जाता है।ऐसा ही हुआ उस शाम जब श्वेता ने उससे कहा कि- बस बहुत हुआ समीर!अब थोड़ा तुम ठहरो,,,कहीं ऐसा न हो कि बहुत देर हो जाये।समीर आदतन वश बोला कोई देर वेर नही होगी डियर बस ये कॉन्सर्ट पूरा कर लूँ फिर बारात के साथ ही आऊँगा।नही तो  देख लो तुम,,,! समीर ने तो कह दिया पर इंतजार करते करते शायद श्वेता को अपने प्यार का रंग उड़ता सा लगा ।डिप्रेशन में थी या कुछ सोंच रही थी ,,,,,उसकी कार का एक्सीडेंट हो गया और अब वह जिंदगी और मौत के बीच झूल रही थी।

समीर के होंठो पर सिर्फ और सिर्फ दुआ थी । कि आपरेशन थियेटर की लाइट ऑफ हुई और डॉक्टर की टीम बाहर आई।ऑपरेशन इज सक्सजफुल ।सी इज आउट ऑफ डेन्जर।थोडी देर बाद होश आ जायेगा फिर आप एक एक करके मिल सकते हो। श्वेता के मम्मी पापा साहिल के पैरेन्टस सब भगवान का शुक्रिया अदा कर रहे थे और समीर...... समीर उस पल का, जब वह यहीं अभी सबके सामने श्वेता की माँग मे सिंदूर भरकर उसे अपने इश्क से रूबरू करायेगा।

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