इस घर में कभी लौटकर मत आना

इस घर में कभी लौटकर मत आना

# वीभत्स रस - घृणा

''मम्मी! पापा का फोन आया था, दादी बहुत बीमार है | चलो ना अस्पताल में एक बार चलकर उन्हें देख आते हैं |'' रूही अपनी माँ जाह्नवी से बोली|

''खबरदार! जो दादी या अपने पापा का मेरे सामने नाम लिया तो| तुम्हें जाने से नहीं रोकती मैं, बस उसी का उन लोगों को एहसान मानना चाहिए |'' क्रोध से जाह्नवी बोली|

चौदह वर्षीय रूही को समझ नहीं आता था कि जाह्नवी इतनी सरल हृदय और हँसमुख प्रवृत्ति की होने के बावजूद उसके पापा या दादी का नाम सुनते ही विकराल रूप क्यूँ धारण कर लेती है |

जिस विद्यालय में जाह्नवी शिक्षिका है उसी विद्यालय में रूही भी पढ़ती है | हर सहपाठी जाह्नवी के व्यवहार की तारीफ करता है | सब रूही को बहुत खुशकिस्मत मानते हैं कि वह इतनी अच्छी माँ की बेटी है फिर उनका नाम सुनते ही मम्मी ऐसे क्यूँ व्यवहार करती है, उसे समझ नहीं आ रहा था |

"मम्मी! पापा का फिर फोन आया है, चलो का एक बार दादी को देख आते हैं | वो बहुत बीमार है |" रूही ने फिर से हिम्मत करते हुए जाह्नवी से कहा |

''देख रूही! तू अभी बच्ची है, तुझे कुछ नहीं पता परंतु मैं उन दोनों से नफरत करती हूँ | मुझे तंग मत कर |''गुस्से से जाह्नवी बोली |


''ठीक है मम्मी! आज आपको मुझे बताना ही होगा कि बात क्या है? नहीं तो मैं आज खाना नहीं खाऊँगी| वैसे भी मैं चौदह साल की हो गयी हूँ | सब समझती हूँ |'' रूही की जिद जाह्नवी जानती थी |

सो आखिर हारकर आज जाह्नवी ने मुँह खोला, "तीन-तीन बेटियों के मेरे पिता ने राजेश को अपनी हैसियत के हिसाब से दान दहेज दिया | परंतु तुम्हारी दादी को हमेशा कम ही लगा| आए दिन घर में मुझे मायके से दिन त्योहार पर कम शगुन लाने को ताने कसती और तुम्हारे पापा से झूठी शिकायत लगाकर मुझ पर हाथ उठवाने में मानो उन्हें सुकूं मिलता था | तुम्हारे पापा पूरे मातृ भक्त थे | मेरी बात ही नहीं सुनते थे | जब तू मेरी गोद में आयी मैं बहुत खुश थी परंतु तब भी तेरी दादी की पोते की आस टूट गयी | दान दहेज की फिर बातें उठी और इस बार पहली बार मेरे पापा ने आकर तेरी दादी को धमकी दी कि वे पुलिस लाएंगे बस उस दिन से तेरी दादी ने मेरे मायके जाने पर रोक लगा दी | मेरे पिताजी से डेढ़ वर्ष तक रिश्ता टूट सा गया | तब तक मैं पुनः गर्भवती हो गयी | मेरा आठवां महीना था, अचानक मायके से फोन आया कि पिताजी को हृदय आघात आया था और बहुत गंभीर हालत थी, वे बस अंतिम समय में मुझे देखना चाहते थे | बहुत रोई गिड़गिड़ाई पर तुम्हारी दादी और पापा टस से मस ना हुए | मैंने पुनः पुलिस के पास जाने की धमकी दी तो तुम्हारी दादी ने मुझे धक्का देकर बाहर निकाल दिया, ये कहते हुये कभी लौटकर मत आना | उस धक्के से पेट पर चोट लगी और तुम्हारा भाई इस दुनिया में आने से पहले ही चला गया और मेरे पापा भी मुझे देखने की आस लिए इस दुनिया से रुखसत हो गए |

बेटा मैंने एक साथ दो-दो अहम जिंदगियों को खो दिया | बस उस दिन से मैंने तेरी दादी और पापा को कभी माफ़ नहीं किया | ना कभी उस घर में वापिस गयी और ना ही तेरे पापा को तलाक दिया |

आज भी मैं उन दोनों से घृणा करती हूँ | मैं क्या बेटा भगवान भी उन्हें कभी माफ़ नहीं करेगा | पर मैं इतनी निर्दयी नहीं कि एक बाप से बेटी को दूर कर दूं क्यूंकि मैं उस दर्द को स्वयं महसूस कर चुकी हूँ | उम्मीद करती हूँ कि तुम मुझे समझोगी |"

जाह्नवी की बात सुनकर रूही स्तब्ध थी | आज उसके आँखों के आगे सारी सच्चाई सामने आ गयी थी |

  ✍️# दिल से दिल तक # पूजा अरोरा

 #नवरसक्वीन

  

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