ईशान हिलाल-प्रथम भारतीय मेल बेली डांसर

ईशान हिलाल-प्रथम भारतीय मेल बेली डांसर

आमतोर पर बेली डांस शैली केवल लड़कियों की मानी जाती हैं।मगर इस मान्यता को चुनौती दी हैं,भारत के ही एक लड़के ईशान ने।जिसका मानना हैं कि डांस किसी एक का नहीं हैं ये एक कला हैं।जिसे लडके भी बराबर दिखा सकते हैं।ईशान आज एक मशहूर बैली डांसर ,मोटिवेशनल स्पीकर,डिजायनर और पेंटर  हैं।खुद को सही साबित करने के लिए ईशान ने बहुत कष्ठों और तिरष्कार का सामना किया।बात करते हैं इनके इस सफर कि :-

दिल्ली का रहने वाला एक साधारण लड़का -ईशान हिलाल।एक वक्त था जब ईशान को कोई नहीं जानता था।लोग हंसते थे उस पर।सबने ‘नचनिया ‘कहना शुरू कर दिया।गलती केवल इतनी की ईशान को डांस का शौक था।वह 9साल का था तब से माधुरी दीक्षित ,वैजंयती माला ,नूतन इनके हाव -भाव और स्टेपस् देखकर बडा हुआ।ईशान अपने मन कि बात डांस और पेंटिग से जाहिर किया करते थे।

ईशान कथक और पढा़ई साथ -साथ करते थे।कभी- कभीडांस के लिए पढा़ई भी बंक की।आस पास के लोग उसे गलत नजरिय से देखते थे।और स्कर्ट और बिंदी वाली नचनीया कहते थे।एक बार ईशान ने स्कूल में डांस में भाग लिया।घर पर पिता को पता चला तो उन्होंने इतना मारा कि पैर में फैक्चर हो गया था।हर बार भी यही होता।ईशान के पिता ईशान को परिवार पर कलंक और इस डांस करने को कुरान के अनुसार पाप कहते थे।उनके अनुसार उनके खानदान में ये सब औरत करती हैं।ये नाचना गाना लड़कीयों का काम हैं।उनकी शान और धर्म के खिलाफ हैं।समाज उन्हें इस शौक के साथ अपनाने को तैयार नहीं था।स्कूल के साथ छिपकर कत्थक सीखा।कत्थक सीखते सीखते बैली डांस का शौक लगा तो छिपकर दिल्ली की “बंजारा स्कूल आॕफ डांन्स” में दाखिला लिया।थोडे़ ही दिनों में चीन में एक डांस प्रतियोगिता हुई।कम समय में ही ईशान इस प्रतियोगिता में सैकण्ड रनर अप रहें।

 

ईशान के डांस के किस्से अब नेशनल ही नहीं इंटरनेशनल मूकाम पर मशहूर थे।अब ईशान के पास शो की कोई कमी नहीं थी। उन्हें कई रियलिटी शो जैसे -“डांस प्लस “और “हाई फीवर” में जाने और कल्कि ,रमो डिसूजा आदी के साथ काम करने को मिला।जो लोग उन्हें ‘नचनीया’ कहते थे अब वो ही उनके घर उनके पापा से आॕटोग्राफ लेते थे।ईशान ने खुद को बतौर “भारत के प्रथम बैली डांसर”के रूप में नाम दिलवाया।

ईशान खुद कहते हैं कि पहले आप अपने आप से प्यार करों।फिर परिवार और समाज से।एक ही जिदंगी मिली हैं उसे अपने हिसाब से अपने सपनों के लिए जिएं।किसी भी रूप में खूद को साबित करना आसान नहीं होता।मगर लगन सच्ची हो तो मंजिल मिल ही जाती हैं।

प्रिय पाठकों ये लेख किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाने के मकसद से नहीं लिखा गया।फिर भी अगर कोई त्रुटी हो तो क्षमा करें।और पंसद आए तो कमेंट और फोलो करें।

धन्यवाद!

 

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