इसके बिना हर खवाब अधूरा

इसके बिना हर खवाब अधूरा

"मेमसाब यह कौन है........ " आया ने पुछा 
"ये मेरी बड़ी बेटी है , दूर हॉस्टल में पढ़ती है , आज ही आई है......." माँ ने बताते हुए कहा 

मीनल दुसरे रूम से कुछ लेने के लिए गयी तो उसने आया को माँ से कहते सुना "तुम्हारी बड़ी बेटी को गोद लिया है क्या तुमने".... मीनल को यह सुनके बहुत दुःख हुआ। आज यह कोई पहली बार नहीं था जब किसी ने ऐसा न कहा हो। मीनल जानती थी इसी वजह से उसे हॉस्टल भी भेजा गया था।

मीनल बहुत हसमुख और मिलनसार लड़की थी पर थोड़ी आत्मविश्वास की कमी रह जाती थी जब सब रिश्तेदार और आस पास के लोग बातों को यह कह के ख़त्म करते माँ से "भाभीजी मीनल का स्वाभाव बहुत अच्छा है पर यह आपकी बेटी नहीं लगती कहाँ से लाए हो...... गोद तो नहीं लिया।" 

मीनल को सजना धजना पसंद नहीं था , माँ जब भी उसे चूड़ी पहनती या बिंदी लगाती तोह मीनल रोने लगती थी उसे लगता यह सारी चीज़ें लड़कियों को कमज़ोर बनती हैं और बस एक अबला नारी की तरह रहती हैं।

मीनल को किसी का किसी से तुलना करना पसंद नहीं था। और इसीलिए उसमें आत्मविश्वास काम हो जाता था जब सारे लोग मीनल की तुलना उसके भाई पुनीत और बहन निगार से करते थे। मीनल चाहे कितने भी सरे काम अच्छे से कर ले उसका सारा काम धरा रह जाता था जब सुंदरता में उसकी तुलना उसके छोटे भाई बहनो से होती थी।  

माँ हमेशा कहती थी कि पुनीत को और निगार को गोरा पैदा किया थोड़ा रंग मीनल को भी दे देते। मीनल भगवान् से हमेशा लड़ती की उसका गोरा बनने का सपना अधूरा क्यों रखा, इसके बिना मेरा हर काम बेकार लगता है मुझे। 

दोस्तों अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दीजियेगा औऋ बताइये कि क्या मिनल सही नहीं कह रही? 

स्वरचित 
हैप्पी {वाणी} राजपूत  

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