जुहू बीच की मस्ती

जुहू बीच की मस्ती

#जुहू बीच की मस्ती


समुद्र...... समुद्र का नाम आते ही मन में विशाल पानी का मन्ज़र,घरघराती हुई बड़ी-बड़ी लहरों का दृश्य,समुद्र के किनारे की रेत और ना जाने कितने सीन आखों के सामने आ जाते हैं । मैं तो लखनऊ में पैदा हुई,वहां तो गोमती नदी के अलावा कुछ देखा नहीं तो मन में एक इच्छा होती थी कि कभी समुद्र देखें साक्षात क्योंकि हमेशा पिक्चरो में ही देखा था ।

शादी के बाद मैं ग़ज़ियाबाद आ गयी ।कुछ वर्षों पश्चात मैं अपने पति और दोनो बेटियों के साथ मुम्बई और गोवा गई, जिन्दगी में पहली बार जुहू बीच देखा और जिस दिन हम जुहू बीच गए उस दिन हाई tide था। इतनी विशाल लहरें और उसके साथ ठंडी-ठंडी रेत और रेत के साथ छोटी- छोटी सीपियाँ आती रही,मानों हम दूसरी दुनिया में मस्त थे ।इतने में एक बहुत बड़ी लहर आई और मेरी छोटी बेटी , जो उस समय तीन वर्ष की थी, की चप्पल उतर कर बह गयी,वो रोने लगी,मेरी चप्पल चली गयी ।हम उसे चुप करा ही रहे थे कि इतने में तेज़ रफ़्तार से लहर वापस आई और उसकी चप्पल हमारे सामने,,हम सब तो हँस हँस के लोट पोट हो गए । इतने खुश जैसे कोई खज़ाना मिल गया । हमारे जीवन में कई बार छोटी छोटी खुशियों इतने मायने रखती हैं कि वो जीवन पर्यंत याद रहती हैं । वहाँ फिर हमने पहली बार काला खट्टा खाया । उसके बाद हम सब पानी के जहाज़ से पूरी रात की यात्रा करके गोवा गए और वहां बहुत से बीच देखे।


उसके कई वर्ष पश्चात हम पटाया (थाईलैंड) बीच गये ।वहाँ समुद में पैरासैलींग की,बनाना बोट राइड की परंतु जो मज़ा पहली बार समुद्र देखने का आया फिर कभी नहीं आया । तभी तो कहते हैं कि पहला नशा,पहला खुमार जैसा कुछ नहीं । आज भी याद करके हमें हँसी आ जाती है ।



पूनम सेहरा

14/196 राज नगर ग़ज़ियाबाद

What's Your Reaction?

like
3
dislike
0
love
0
funny
1
angry
0
sad
0
wow
0