#जलियांवाला बाग हत्याकांड

"क्या कसूर था उन निहत्थे भाइयों का,क्या कसूर था उन महिलाओं का जो बेवजह विधवा बन गई,क्या कसूर था उन मासूम बच्चों का जो अनाथ बन गए?? ना जाने कितने घर तबाह हो गए और एक दूसरे से बिछड़ गए।"

मैं बात कर रही हूं "जालियांवाला बाग हत्याकांड" की।


13अप्रैल 1919 की यह भयावह हत्याकांड बहुत ही निंदनीय अपराध थी।जालियांवाला बाग अमृतसर में स्थित है,जहां 13अप्रैल सन् 1919 में एक सभा आयोजित की गई थी जिसमें रॉलेट एक्ट का विरोध करना था।"रॉलेट एक्ट" को काला कानून भी कहा जाता है। यह 18 मार्च 1919 को भारत की ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत में उभर रहे राष्ट्रीय आंदोलन को कुचलने के उद्देश्य से निर्मित कानून था। यह कानून सर सिडनी रौलेट की अध्यक्षता में बनी थी।इस एक्ट के तहत ---


•ब्रिटिश सरकार को यह अधिकार प्राप्त हो गया था कि वह किसी भी भारतीय पर अदालत में बिना मुकदमा चलाए उसे जेल में बंद कर सके। इस क़ानून के तहत अपराधी को उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने वाले का नाम जानने का अधिकार भी समाप्त कर दिया गया था।


•क्रांतिकारियों के मुकदमे के फैसले के बाद किसी उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार छीन लिया गया था।

• राजद्रोह के मुकदमे में जजों को बिना जूरी की सहायता से सुनवाई करने का अधिकार था।

• सरकार को यह अधिकार होना चाहिए कि वह बलपूर्वक प्रेस की स्वतंत्रता का अधिकार छीन ले और अपनी इच्छा अनुसार किसी व्यक्ति को कारावास दे दे या देश से निष्कासित कर दे।


बैसाखी के दिन 13 अप्रैल 1919 को शहर में कर्फ्यू लगा हुआ था, जब नेता जालियांवाला बाग में भाषण दे रहे थे, तभी ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर 90 ब्रिटिश सैनिकों को लेकर वहां पहुँच गया। उन सब के हाथों में भरी हुई राइफलें थीं।सैनिकों ने बाग को घेर कर बिना कोई चेतावनी दिए निहत्थे लोगों पर गोलियाँ चलानी शुरु कर दीं। 10 मिनट में कुल 1650 राउंड गोलियां चलाई गईं। जलियांवाला बाग उस समय मकानों के पीछे पड़ा एक खाली मैदान था। वहाँ तक जाने या बाहर निकलने के लिए केवल एक संकरा रास्ता था और चारों ओर मकान थे।


भागने का कोई रास्ता नहीं था। कुछ लोग जान बचाने के लिए मैदान में मौजूद एकमात्र कुएं में कूद गए, पर देखते ही देखते वह कुआं लाशों से भर गया।


मरने वालों का सही आंकड़ा ठीक से नहीं बताया गया है लेकिन अनुमान है कि 1000-1500 लोग मारे गए और 2000 लोग घायल हुए।


इस जघन्य अपराध के लिए ब्रिटिश सरकार ने भी निंदा की थी।1997 में महारानी एलिज़ाबेथ ने इस स्मारक पर मृतकों को श्रद्धांजलि दी थी।


यह घटना इतिहास के पन्नों पर अविस्मरणीय दुखद चित्रण है।


ऋषा दत्ता✍️

#जालियाँवाला बाग


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