#जलियांवाला बाग:एक बर्बर नरसंहार....

"दादी ये जालियांवाला बाग कहाँ है और इसकी क्या कहानी है?"निक्की ने अपनी दादी शोभा से पूछा। शोभा बोली,"मेरी दादी बताती थी।हमारे भारतीय इतिहास का एक भयानक नर संहार....


"भारत में आजादी के लिए तेजी से बढ़ रहे राष्ट्रीय आंदोलनों को कुचलने के लिए अंग्रेज हुकूमत ने रोलेट एक्ट मार्च 1919 में पारित किया।उसके बाद से ही इसके विरोध में पूरे भारत में जगह- जगह आंदोलन शुरू हो गए।


13 अप्रैल को वैशाखी के दिन पंजाब के अमृतसर में सिखों के तीर्थ स्थल 'स्वर्ण मंदिर' के पास, जलियांवाला बाग नामक जगह पर रोलेट एक्ट के खिलाफ एक सभा आयोजित की गई।ब्रिटिश सेना के अधिकारी'जनरल डायर' को यह बात पता चली,तो कई सैनिकों सहित जनरल डायर ने जलियांवाला बाग को चारों ओर से घेर लिया और जनरल डायर ने अपने सैनिकों को निहत्थे लोगों पर गोलियाँ चलाने का आदेश दिया।


करीब दस से पंद्रह मिनट तक बिना रुके हुए ब्रिटिश सैनिकों ने १६०० से १७०० राउंड फायरिंग की।लोग जान बचाकर बाहर भी नहीं निकल पाए क्योंकि बाग को चारों तरफ से अंग्रेजों ने ही घेर रखा था।कई औरतें और बच्चे,अपनी जान बचाने के लिए इस बाग में बने कुएँ में भी कूद गए इसलिए अब इसे 'शहीदी कुआँ' के नाम से जाना जाता है।


इस हत्याकांड में कई मासूम बच्चों और बेकसूर लोगों की जाने गईं।ब्रिटिश सरकार के मुताबिक ३७९ लोगों ने इस निर्मम हत्या कांड में अपनी जान गंवाई और २०० लोग घायल हुए,जबकि हकीकत में कई लोग शहीद हुए थे।इस बर्बर हत्याकांड ने भारतीयों के मन में ब्रिटिश सरकार के प्रति क्रोध को और बढ़ा दिया और स्वतंत्रता प्राप्ति के प्रयास और तेज हो गए।भगत सिंह ने भी इस हत्याकांड के बाद अपने आप को पूरी तरह से देश की आजादी के लिए समर्पित कर दिया।


इस हत्याकांड के बाद जनरल डायर को ब्रिटेन वापस बुला लिया गया।सन् १९४० में उधम सिंह ने इंग्लैंड जाकर जनरल डायर की हत्या कर दी।इसे ब्रिटिश साम्राज्य के सबसे निर्मम हत्या कांड के रूप में जाना जाता है।भारत की आजादी के बाद जलियांवाला बाग में एक स्मारक का निर्माण किया गया। जिसका नाम 'अग्नि की लौ'रखा गया।हर साल हजारों लोग जलियांवाला बाग जाते हैं और १३ अप्रैल को प्रतिवर्ष उन शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है जिन्होंने उस वक्त इस हत्याकांड में अपनी जान गंवाई थी।उस स्थान पर आज भी गोलियों के निशान मौजूद हैं ।इतिहासकार इसे आधुनिक इतिहास का सबसे अधिक रक्त रंजित नरसंहार कहते हैं।"यह सुनाते-सुनाते,शोभा की आँखें भी नम हो गईं।


निक्की ने पूछा,"क्या हुआ दादी?"


शोभा बोली,"कुछ नहीं बेटा!जब भी मेरी दादी इस घटना के बारे में बताती थी तो रो पड़ती थी क्योंकि मेरे दादाजी भी उस दिन जलियांवाला बाग में शहीद हुए थे।मैं भी जब जब इस दुखद हादसे के जिक्र करती हूँ तो आप हमें अपने आप आँसू आ जाते हैं।"


निक्की बेटा! हमेशा याद रखना हमें आजादी सैकड़ों हिंदुस्तानियों की जान देकर मिली है इसलिए अपनी आजादी की कीमत को पहचानो और अपने देश और स्वतंत्रता-संग्राम-सेनानियों के प्रति हमेशा ऋणी रहा करो। जाओ बेटा!रात बहुत हो गई। तुम सो जाओ।"


रितु अग्रवाल

#जलियांवाला बाग



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