कचरा साफ किया क्या?

कचरा साफ किया क्या?

अरे! ये क्या कह रही हैं आप ?कचरा तो घर में होता है ,सड़कों पर होता है जिसे हम साफ कर देते हैं ।मन का कचरा क्या हुआ? मन में भी कहीं कचरा होता है ?


"हाँ दोस्तों ! हमारे अपने मन में हमने अपने अंदर, अपनी सोच में कई कचरे जमा कर रखे हैं जो फालतू में है और जिनका कोई उपयोग नहीं है। हम उन्हें साफ भी नहीं करते हैं और उस पर परत दर परत धूल जमती जाती है ।पुरानी बातें जिनका हमारे वर्तमान और भविष्य से कोई मतलब नहीं है ।वे बातें तो हर पल हमें उदास कर जाती हैं, वे कड़वी यादें जिन्हें याद कर हम हमारी आँखों में आँसू आ जाते हैं। उन बातों का आज ही...सॉरी अभी ही उन बातों को निकाल फेंकिए और अपने दिल और दिमाग से कचरे को साफ कीजिए ।


मन में जगह बनेगी तभी तो आप अच्छी यादों और खुश करने वाली यादों को अपने अंदर जगह दे पाएंगे ।वे यादें और बातें हमें हिम्मत देंगी और हमें अपने जीवन में आगे बढ़ने में मदद भी करेंगे। उन लोगों को भी अपने मन से निकाल दीजिए जो हमेशा नेगेटिव बातें करके आपके मन और दिमाग में डालते हैं और आप को कमजोर महसूस करवाते हैं क्योंकि हर इंसान में कोई न कोई ताकत होती है ,कोई पॉजिटिव बात होती है जिसे हमें खुल कर देखना चाहिए और उसे बाहर निकालना चाहिए। नेगेटिव लोगों और नेगेटिव बातों को जब आप अपने मन से बाहर फेंक देंगे तो आपका मन भी हल्का हो जाएगा और आप खुद को खुशी और सुकून की बाँहों में पाएंगे ।


इसलिए दोस्तों समय-समय पर अपने मन से कचरे को हटाते रहिए ।कहीं ये आपके मन को अंदर ही अंदर खराब ना कर दे? और आपका मन कचरे का डिब्बा न बन जाए। अगर बनाना ही है तो अपने मन के डिब्बे में खुशी ,आत्मविश्वास ,सकारात्मक चीजें और बातों को रखिए जो आपके मन को सुगंधित करने के साथ-साथ आपके आसपास भी सभी को सुगंधित कर जाएँ। आज ही खुद से और अपने अपनों से पूछिए-


" कचरा साफ किया क्या?"

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