#कुछ अनकहा#थर्सडे पोएट्री चैलेंज

#कुछ अनकहा#थर्सडे पोएट्री चैलेंज


बहुत कुछ अनकहा सा रह जाता है
हम दोनों के दरम्यान
जब भी पुराने किस्सों की पोटली खुलती है
जाने हम दोनो की दृष्टि क्या दूंढती है....
कुछ स्मृति चिन्ह हैं
जो हम दोनों बचा ले जाते हैं
दूसरों की उत्सुक और खोजी निगाहों से..
वही तो थाती है हम दोनों के रिश्ते की
बूझती है हर कसौटी जिंदगी की
कोई महीन धागा है रेशम का
जो बांधता है बंधन ये मन का..
कुछ अनछुआ सा ,कुछ अनबुझा सा
जो सिर्फ महसूस किया जा सकता है
धडकनों में गूंजती हुए रागिनी में
गगन में बिखरी हुई चांदनी में
वो जो सामने होकर भी अदृश्य है
पर हृदय के बहुत करीब है
एक हौला सा स्पर्श है
ये नैनों का गुप्त विमर्श है...
समर्पण है एक दूसरे के प्रति
आवश्यक नहीं है कोई भी लिपी
बस मन से मन का मेल है
नहीं है कोई दुर्लभ जादूगरी
सिर्फ जज्बातों का खेल है
यह तो प्रकृति की अनमोल कृति है
इस प्रेम तो मौन में ही मुखरित है..

नीलम राज

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