कुछ यूँ हम मिले #जुड़वाँ राइटिंग चैलेंज

कुछ यूँ हम मिले #जुड़वाँ राइटिंग चैलेंज

बात 2005 की है शिक्षिका के रूप में चयन होने के बाद तीस दिवसीय प्रशिक्षण में मैं गयी थी।नम्रता जो थी दूसरे कमरे में थी,उसके प्रति मेरा आकर्षण था और आकर्षण की वजह थी उसका व्यक्तित्व।


जहाँ मैं थोड़ा डरी सहमी सिमटी सी रहती थी और स्वास्थ्य की वजह से घर से बाहर जाने की वजह कम ही मिलती थी।वह बिल्कुल बिंदास थी।हमारे छोटे से कस्बा में वह पहली लड़की मुझे दिखी थी जो स्कूटी चलाकर प्रशिक्षण स्थल पर अकेले आती थी।मुस्कान के आदान प्रदान के साथ ही धीरे धीरे परिचय का सिलसिला बढ़ा।बातें होने लगी फिर उसने मुझे लगभग हर रोज प्रशिक्षण स्थल से घर ले जाने का जिम्मा ही ले लिया।और जिंदगी को एक नए रंग से मैंने रंगना शुरू किया।हमारी बातें शरारतें मस्तियाँ जिंदगी को जिंदगी देती थी।फिर उसके बाद हमलोग ने अपने अपने स्कूल में योगदान दे दिया।और फिर मुलाकात का सिलसिला कम हो गया,पर पता ही न चला कि ये मुलाकात कम होने का सिलसिला हमारी दोस्ती को प्रगाढ़ कर रहा है।


उसके बाद कोई भी प्रशिक्षण हो कोई भी अतिरिक्त डयूटी हो फिर वह पता करती की मेरा नाम है या नही और फिर दोनों एक साथ जाते।हमारी जोड़ी काम करने में पहले स्थान पर तो रहते ही,गलत का विरोध करने,किसी को कुछ सुनाना हो तभी भी चूकते नही थे।इस तरह हमलोग एकदूसरे के बेहद करीब आ गये।फिर उसकी शादी हो गयी और शादी के बाद तो उसके पति भी मेरा ध्यान रखने लगे तीनों इकट्ठे होते गप शप चाय नाश्ता खूब मजे करते हमलोग।फिर एक समय आया कि कुछ व्यक्तिगत समस्याओं के कारण उसने यह नौकरी छोड़ दी।और अपनी पढ़ाई शुरू कर दी।हमारा मिलना तो कम हो गया,पर इस बात का कभी एहसास नही हुआ कि हम दूर हैं।बातें कम ही होती फिर भी हम एक दूसरे को इतने अच्छे से समझने लगे कि आज तक हमारे बीच किसी तीसरे की जगह नही है।

सबसे बड़ी बात हमारी दोस्ती की है हम किसी को। ज़ज नही करते,एक दूसरे पर अपने विचार नही थोपते।उसका होना ही मेरे लिये आत्मबल है।

और उसका कहना कि तुमसे तो पहली नजर का प्यार है,मुझे मुस्कुराने पर मजबूर कर देता।

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