कौन था आखिर वो

कौन था आखिर वो

बचपन से ही रिया माँ की सबसे दुलारी संतान थी,सबसे छोटी जो थी...छह बच्चों में। बड़ी हो गयी...लेकिन माँ के साथ सोना नहीं छूटा।सभी भाई बहन खूब चिढ़ाते उसे,लेकिन उस पर कोई फर्क नहीं पड़ता।शादी हुई...बड़ी मुश्क़िलों से वो ससुराल में रहना सीखी। फिर तो ऐसा रची बसी कि माँ को फख्र होता।रिया के दो बच्चे थे। उसने अपनी बेटी का विवाह पक्का कर दिया...माँ की बड़ी इच्छा जो थी। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। विवाह के तीन महीने पहले अच्चानक माँ चल बसीं। रिया बेहद सदमे में...अब क्या होगा...ऐसे कैसे हमे छोड़ कर चली गईं.....सभी समझाते कि शादी की तैयारी में मन लगाओ।पति और बेटी,अपने आफिस चले जाते और बेटा तो बाहर ही था। रिया घर पर अकेली रह जाती।पर उसे हर पल यही लगता कि कोई और भी है। वो किचेन में होती,तो लगता..कोई तेजी से रूम में गया है....रूम में जाती, तो लगता कोई आंगन में चल गया। न कोई आहट, न आवाज..बस साया से महसूस होता।। वो पति से बताती तो वो यही समझाते कि तुम्हारा भ्रम है।धीरे धीरे विवाह का दिन भी आ गया। रिया को रामपुर से दिल्ली जाना था शादी के लिए। उसके भाई बहन और नंदे आ गईं थी..सबको साथ ही जाना था। तैयारी करते करते रात के दो बजे गए। रिया ने हाथों में मेहंदी लगवा रखी थी..थोड़ी देर के लिए वो भी लेट गयी कि तीन बजे ही तो उठ जाना है। उसकी आंख लगी ही थी कि उसे लगा,किसी ने उसके हाथ पर हाथ मारा...वो छुवन बर्फ से भी ज्यादा ठंडी थी...माँ की आवाज भी सुनाई दी, " सोती ही रहोगी क्या??? जाना नही है...मंदिर जाओ..बिटिया को सुहाग दिलवाने"रिया की आंख खुली,तो साफ लगा कोई बाथरूम की तरफ गया है। वो इंतजार करने लगी,कि जोभी गया है,वो निकले तो रिया भी जाकर फ्रेश होले। दस मिनट बीत गए,कोई आवाज ही नहीं..तब उसने लाइट जलाई तो देखा,सभी सो रहे थे...तो बाथरूम कौन गया???? वो उठकर गयी...तो बाथरूम का दरवाजे खुले पड़ा था...वहां कोई न था।रिया आज भी अपनी हथेली पर वो बर्फ सी छुवन महसूस करती है..और सोचती है..कौन था आखिर वो???? क्या माँ??? 

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