क्रोध पर काबू पाने के लिए स्वयं को अहमियत दीजिए.- ज्ञानी वाणी

क्रोध पर काबू पाने के लिए स्वयं को अहमियत दीजिए.- ज्ञानी  वाणी


अगर मैं आपसे कहूँ कि दूसरों को कम और स्वयं को अधिक अहमियत दीजिए, तो आप कहेंगे कि ये क्या बात हुई? शायद मैं आपको स्वार्थी बनने की सलाह दे रही हूँ।
परन्तु ऐसा बिल्कुल नहीं है, यदि आपको क्रोध अधिक आता है, तो मैं आपको यहाँ अकारण क्रोध को काबू में रखने के लिए कुछ टिप्स दे रही हूँ।

जी हाँ आजकल लोगों का मानसिक तनाव इतना बढ़ गया है कि उसकी परिणति क्रोध व फ्रस्ट्रेशन के रूप में सामने आती है, और ऐसी स्थिति में आप न चाहते हुए भी सामने वाले पर फट पड़ते हैं और किसी भी बात के लिए दोषी ठहराते हैं।

परंतु शब्दों में थोड़ा हेर फेर करके अपनी बात कही जाए तो बहुत बार बात बढ़ने से बचाया जा सकता है।
उदाहरण के लिए आपके किशोर बच्चे आपकी गृहकार्यों में बिल्कुल मदद नहीं करते और आप अक्सर ऑफिस से आकर क्रोध से फट पड़ती हैं तो घर का माहौल तो बिगड़ना स्वाभाविक है।
आप बोलेंगी
"इतने बड़े हो गए तुम लोग लेकिन जरा सी मदद नहीं करते हो।"

इसके स्थान पर कहिए
"मुझे लगता है कि अब तुम लोग इतने बड़े तो हो गए हो कि काम में मेरी मदद कर सको।"

इसी तरह पतिदेव के साथ भी बहुत सी बातें होती होंगी जो आप या वो एक दूसरे को सीधा दोष देते होंगे

उनके साथ भी यही तरीका आजमाइए कि \"मुझे लगता है तुम्हें ऐसे करना चाहिए\"। तो इस तरह दी न आपने स्वयं को अधिक अहमियत?

मेरी बात का मतलब केवल इतना सा है कि हर समय परिवार के किसी न किसी सदस्य पर कोई दोषारोपण करते रहना सदैव माहौल बिगाड़ता है और आपके क्रोध को और भड़काता भी है। उसके स्थान पर शब्दों का थोड़ा सा हेर फेर न केवल आपको क्रोध पर काबू रखना सिखाएगा बल्कि सामने वाले पर आपकी बात का असर भी अधिक होगा।

क्रोध पर नियंत्रण रखने के लिए क्या करें?

बात मुँह से निकालने से पहले एक बार मन में दोहरा लीजिए। आपको समझ में आ जाएगा कि ऐसे कहना उचित है या नहीं।

क्रोध पर नियंत्रण नहीं है तो गहरी श्वास अर्थात प्राणायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाइए।

खुली हवा में सैर कीजिए।

ओवरथिंकिंग क्रोध की एक बड़ी वजह है। आवश्यकता से अधिक सोचने से निगेटिव बातें मस्तिष्क में आती हैं जो असंतोष व क्रोध का कारण बनती हैं।

ऑफिस का तनाव घर में न लाएँ।

पारिवारिक सदस्यों के साथ सकारात्मक बातचीत अवश्य करें।

संगीत अवश्य सुने। ऑफिस से वापस आते समय यदि संगीत सुनेंगी तो घर पहुँचने तक मूड अच्छा होगा।

यदि पढ़ना पसन्द है और आप बस या कैब से वापस आती हैं तो अपनी रुचि की किताब भी पढ़ सकती हैं।

याद रखिए परिवार के सदस्य आपके लौटने का बेसब्री से इन्तजार करते हैं। वापस आकर उन पर क्रोध की नहीं प्रेम की बरसात कीजिए।

अर्चना सक्सेना

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