#काश मैं होती.... तमाशबीन

#काश मैं होती.... तमाशबीन

आज वीकेंड पर बच्चों ने रात में "मर्दानी 2" देखने का कार्यक्रम बना लिया। सब बहुत उत्साहित थे। बहुत दिनों बाद हम चारों एक साथ एक मूवी देखने वाले थे। जल्दी जल्दी डिनर ख़त्म कर लिया।मूवी के साथ स्नैक्स और कोल्ड ड्रिंक की भी व्यवस्था कर ली गई। मैं तो वैसे भी रानी मुखर्जी की बड़ी फैन हूँ। तो मैं तो बहुत ही उत्साहित थी।


ख़ैर मूवी चालू हुई। जैसे जैसे पिक्चर आगे बढ़ रही थी। सब शांत होते जा रहे थे। पिक्चर में इतना ख़ो गए कि हम सब स्नैक्स और कोल्ड ड्रिंक को भी भूल गए।यश राज फ़िल्म्स की पिक्चरें ऐसी ही रोचक होतीं हैं। एक बार देखने बैठ जाओ तो पूरी करके ही उठो।


पूरी पिक्चर में एस.पी शिवानी का रोल बहुत सशक्त था। आज के जमाने में हर लड़की को मानसिक तौर पर इतना ही मज़बूत और ताकतवर होना चाहिए। 


और वो लड़का सनी..... उसे तो सभी पूरी पिक्चर में गालियाँ देते रहे। लग रहा था.... कि सच में अगर ये लड़का सामने आ जाए तो किसी ने किसी के हाथ से तो मर जाएगा।


पिक्चर के अंत में जब शिवानी राव उस लड़के को मार रही थी.... तो जैसे मेरे अंदर का सालों पुराना रोष निकल पड़ा। मैं अचानक से चिल्लाने लगी..... मार दो इसको.... छोड़ना नहीं।


बच्चे हँसने लगे,"अरे मम्मी ! कंट्रोल.... असलियत नहीं.... पिक्चर है ये। बच्चों के बार बार हिलाने पर लगा.... जैसे मैं किसी लंबी नींद से वापस आई हूँ..... मैं बच्चों और पतिदेव को हँसता देख़ सकपका गई।


सब सोने चले गए थे। पर नींद मुझसे कोसों दूर थी। मैं अपने अतीत में पहुँच गई थी।बात उन दिनों की थी जब मैं कॉलेज के प्रथम वर्ष में थी। वो लड़के लड़कियों का कॉलेज था। पर उन दिनों में लड़के लड़कियाँ आपस में कम ही बातें किया करते थे। उन दिनों कॉलेजों में गुंडा गर्दी भी चरम सीमा पर थी।


एक दिन कॉलेज से छूटते समय कुछ लड़के मेरी ही क्लास की एक लड़की को परेशान करने लगे। कभी भद्दे कमेंट करते तो कभी उसका दुपट्टा छीनते।वो लड़की बेचारी मदद की गुहार लगा रही थी।हम सब वहाँ खड़े थे। पर कोई उसे नहीं बचा रहा था। मैं बहुत डर गई थी वो सब देख कर।


वहाँ खड़े तमाशबीनों ने बताया कि वो सब अमीर और बिगड़ैल लड़के हैं..... जिनसे कोई कुछ नहीं बोलता। उनमें से कुछ लड़के राजनेताओं के घरों से भी ताल्लुक़ रखते थे।


मुझे अपनी बेचारगी पर गुस्सा आ रहा था। पर न तो मेरे पास हिम्मत थी, न किसी का सहयोग और न ही कोई पॉवर। 

थोड़ी देर में वो लड़के उस लड़की को खींचते हुए एक गाड़ी में ले गए। हम सब तमाशबीन तमाशा देखते रह गए।


कुछ दिनों पता चला कि उस लड़की की लाश एक जंगल में मिली है। उस दिन मैंने अपने पापा को इस उम्मीद में रोते रोते पूरी कहानी सुनाई कि शायद वो मेरी कुछ मदद कर पाएंगे। मुझे पुलिस स्टेशन ले जाएंगे।


पर मैं अपने पापा की प्रतिक्रिया देख दंग रह गई। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं वो हादसा एक बुरा सपना समझ कर भूल जाऊँ और उन्होंने मुझे अगले पन्द्रह दिन तक कॉलेज भी नहीं जाने दिया।


बाद में पता चला कि पुख़्ता सबूतों के अभाव में उन लड़कों को छोड़ दिया गया।वो लड़के तो बरी हो गए थे। पर मैं उस लड़की की भयावह चीखों से कभी बरी नहीं हो पाई।आज भी अपने आप को बचाने की गुहार लगाती वो लड़की मेरे सपनों में आकर अक़्सर मुझसे पूछती है कि उस दिन तुमने मुझे क्यों नहीं बचाया???? क्यों तुम बस एक तमाशबीन की तरह तमाशा देखती रही????


काश! काश मैं भी शिवानी शिवाजी रॉय की तरह होती। मेरे पास वो हिम्मत होती..... मेरे पास लड़ने की ताक़त होती..... मेरे पास शिवानी की तरह पॉवर होती....तो शायद उस दिन वो मासूम लड़की इस तरह अपनी जान न गँवाती और उन राक्षसों को सज़ा दिला पाती।


काश! मैं भी शिवानी शिवाजी रॉय होती.....

#काश मैं होती...

























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