काश वो लम्हा मैं जी पाती........

काश वो लम्हा मैं जी पाती........


बनकर बूंदें ओस की तेरी पलकों पर,
कुछ देर ही सही..........मैं ठहर पाती।
सूर्य की लालिमा बन........
तेरे चेहरे को मैं दमका पाती।
एक बार ही सही,,
काश वो लम्हा मैं जी पाती।।

हो जाती फिर सुहानी,
इस जीवन की हर शाम।
गर तू कहता तो जोड़ देती,
तेरे नाम संग मैं अपना नाम।
तेरे संग होने से रोज ही.......
जीवन की एक नयी कहानी रची जाती।
एक बार ही सही,,
काश वो लम्हा मैं जी पाती।।

होती एक-दूजे से ही बस हमारी पहचान,
समा जाती तुझमें बनकर मैं तेरी जान।
होती संग-संग ही पूर्ण फिर,
अपने जीवन की हर शाम।
गर तू कहता तो जोड़ देती,
तेरे नाम संग अपना नाम।
तू ही मेरे इस जीवन की
अनमोल निशानी कहलाती।
एक बार ही सही,,
काश लो लम्हा मैं जी पाती।।

उफ्फ यह जनवरी हर बार,
कोहरे के प्रेम की बर्फीली चादर ओढ़े आती।
उमंग और उल्लास की लहर
चहुंओर यूँ ही पसर जाती।
स्मरण हो आता विस्मरणीय मिलन वह प्यारा,
ऊँचे-ऊँचे बर्फीले पहाड़ों संग सड़क का किनारा।
थामकर हाथ एक-दूजे का बढ़ते थे जो कदम,
सबसे मनोरम और सलोने थे वो जिए हुए पल।
एक बार ही सही,,
काश वो लम्हे मैं फिर से जी पाती।।

✍शिल्पी गोयल (स्वरचित एवं मौलिक)

#जनवरीकविताएं #काश वो लम्हा मैं जी पाती 

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