कदमों के निशां

कदमों के निशां


कदमों के निशां बयां करते हैं जिंदगी के सफ़र की दास्तां ,
हर एक सफ़र छोड़ जाता है अपने पीछे राहगीरों के कदमों के निशां,
शिशु की पहली किलकारी से होता आरंभ जो जीवन चक्र ,
लड़खड़ाते कदमों के साथ जो शुरू और खत्म होता है
हर लड़खड़ाहट अपने पीछे निशा जिंदगी के छोड़ जाती है,
शिशु का पहला कदम हर्षित मां के मन को कर जाता है,
हाथ पकड़कर जो पिता उस के कदमों को चलना सिखाता है,
छोटे-छोटे कदमों के निशां उस घर के आंगन में सदियों के लिए छप जाता है
पुत्र पूर्वजों के कदमों के निशां का अनुसरण करत हुए घर की परंपरा चलात है,
पुत्री छोड़ अपने कदमों के निशां पिता के घर में,
नई परंपरा को अपनाने अलते से सजे पैरों से, साजन के आंगन को सजाने ,
लक्ष्मी रूप बन स्थापित करती है कदमों के निशां आंगन में कई सारे,
सौभाग्य और समृद्धि के बन जाते हैं यह कदमों के निपां प्रतीक प्यारे -प्यारे,
गृहस्थ में होकर व्यस्त यौवन से होकर प्रौढ़ जिंदगी का कारवां छोड़ जाता है कदमों के कई निशां,
कोई उन्नति की ओर है जाता, तो कोई जीवन के भवसागर मे फंस जाता ,
कुछ कदमों के निशां रेत पर बने ऐसे होते, समुद्र की लहरों के साथ जो समुंद्र में ही विलीन होते, कदमो के निशां की कुछ गाथा इतिहास में हो जाती है दर्ज,
कुछ कदमों के निशां बन प्रेरणा अमर हो जाते हैं ,
जीवन पथ का अनुसरण हमें कराते हैं
जीवन की राह और राहगीरों के बीच सही बुरे का फर्क बताते हैं ,
परिश्रम कर कठिनाइयों के पत्थरों को तोड़ राह में आई रुकावट को हटाना सिखाते हैं ,
ज़मीं पर रख कदम आसमां छूना सिखाते हैं ,
कदमों के ऐसे निशां नई पीढ़ियों के लिए ध्रुव तारा बन धरती पर उतर आते हैं ,
ऐसे महापुरुषों के कदमों के निशा पर हम सब अपने मस्तक झुकाते हैं।
दीपिका राज सोलंकी, आगरा उत्तर प्रदेश

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