कठपुतली का खेल

कठपुतली का खेल

दोस्तों कठपुतली का डांस  आज भी हमें रोमांचकारी लगता है। जहां भी हमें इसका डांस देखने को मिलता है, हम बरबस ही रूक जाते हैं ।अभी इस न्यू ईयर के टूर पर हमें भी कठपुतली का डांस देखने को मिला तो हमने इसके बारे में कुछ और उनसे मालूम करा जो मैं आप सब से शेयर कर रही हूं।

हमारे देश में तो यह कला लगभग दो हज़ार वर्ष पुरानी है। पहले नाटकों को प्रस्तुत करने का एक मात्र माध्यम कठपुतलियाँ ही थीं। आज तो हमारे पास आधुनिक तकनीक वाले कई माध्यम रेडियो, टी.वी, आधुनिक तकनीकी सुविधाओं वाली रंगशालायें, मंच सभी कुछ है। लेकिन पहले या तो लोक परंपराओं की नाट्य शैलियाँ थीं या फिर कठपुतलियाँ

कठपुतलियाँ या तो लकड़ी की होती हैं या पेरिस-प्लास्टर की या काग़ज़ की लुग्दी की। उसके शरीर के भाग इस प्रकार जोड़े जाते हैं कि उनसे बँधी डोर खींचने पर वे अलग-अलग हिल सकें।

कठपुतली का खेल अत्यंत प्राचीन नाटकीय खेल है ।गुड़ियों के नर मादा रूपों द्वारा जीवन के अनेक प्रसंगों की, विभिन्न विधियों से, इसमें अभिव्यक्ति की जाती है और जीवन को नाटकीय विधि से मंच पर प्रस्तुत किया जाता है।

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