कोविड टीकाकरण के बारें में गलतफहमी ना पालें

कोविड टीकाकरण के बारें में गलतफहमी ना पालें

कोविड-19 के टीकाकरण के बारे में अज्ञानता और अफ़वाहों के चलते ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर लोग टीका लगवाने से कतरा रहे है। आज हम इतिहास का सबसे बड़ा सामूहिक टीकाकरण अभियान देख रहे हैं। बड़ी संख्या में लोगों को टीका लगाया जा रहा है। अभी तक कहीं से ऐसी कोई दुर्लभ घटना सामने नहीं आई की टीका लगाने के बाद दुष्परिणाम देखा गया हो।


कुछ लोग कोविड को गंभीरता से नहीं ले रहे इसे सामान्य बुखार ही समझते हैं। लोगों को यह समझने की जरूरत है कि कोविड भले कुछ मामलों में हल्का असर दिखा रहा हो, लेकिन जब वह गंभीर रूप ले लेता है, तो उससे जान भी जा सकती है, और हमने लाखों लोगों को जान गंवाते देखा है। कोविड से बचने का एक मात्र उपाय वैक्सीन है। भारत में उपलब्ध कोविड-19 वैक्सीनें पूरी तरह सुरक्षित है। सभी वैक्सीनों का परीक्षण किया गया है, जिसमें क्लीनिकल ट्रायल शामिल हैं। इन परीक्षणों को पूरी दुनिया में मान्यता प्राप्त है।


जहां तक टीके के बुरे असर का सवाल है, तो सभी वैक्सीनों में हल्का-फुल्का असर पड़ता है। इसमें हल्का बुखार, थकान, सूई लगाने वाली जगह पर दर्ज आदि, जो पेरासिटामोल जैसी दर्द निवारक दवाई से एक-दो दिन में ठीक हो जाता है। टीकों का कोई गंभीर बुरा असर नहीं होता। जब बच्चों को अलग-अलग बिमारियों के नियमित टीके दिये जाते हैं, तो उन्हें भी बुखार, सूजन आदि जैसे लक्षण होते ही है जो एक दो दिन में ठीक हो जाता है।


कोविड-19 टीकाकरण आपको कोविड-19 से बचाने में मदद करेगा। टीकाकरण करवाने के बाद आपको जो सामान्य संकेत हैं वो दर्शा रहे है कि आपका शरीर सुरक्षा आवरण का निर्माण कर रहा है। कुछ लोगों में कोविड-19 टीका लगने के बाद एलर्जी हो सकती है। यदि आपको कभी भी अन्य टीकों या इंजेक्शन से गंभीर एलर्जी हुई है तो आप टीकाकरण कराने से पहले अपने डॉक्टर से इस संदर्भ में बात करें।


कुछ लोगों को ये गलतफ़हमी भी है की वैक्सीन से नपुंसकता आ जाती है। पर ये बात कहीं साबित नहीं हुई है, नांहि ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण अब तक सामने आया है कि कोविड-19 का टीका महिलाओं या पुरुषों में नि:संतानता का कारण बन सकता है।


वैक्‍सीन से कतराने वाले लोगों की दलील है कि जब टीका लगवाने पर भी लोग संक्रमित हो रहे हैं तो इसका क्‍या फायदा है। इस सवाल का सीधा जवाब है कि कोरोना वैक्‍सीन न लगवाने वाले गंभीर संक्रमण के शिकार हो सकते हैं, जबकि वैक्‍सीन लेने वाले इसतरह के गंभीर संक्रमण से बच सकते हैं। वैक्‍सीन से इस वायरस के संक्रमण को बढ़ने से रोका जा सकता है। कोई भी वैक्‍सीन इस वायरस पर सौ फीसद कारगर नहीं है। पर कोरोना की क्षमता को कम करके शरीर को इसके प्रभाव से बचाया जरूर जा सकता है।


एक बार कोरोना संक्रमित होने के बाद भी वैक्सीन जरूर लें यदि वैक्‍सीन लेंगे तो शरीर में पहले से मौजूद एंटी बॉडीज को और अधिक ताकतवर बनाया जा सकता है। लेकिन यदि वैक्‍सीन नहीं ली तो गंभीर संक्रमण की चपेट में वापस आ सकते हैं।


कोविड टीका लगवाने के बाद कुछ लोगों में कोई बुरा असर नहीं दिखता तो इसका यह मतलब ये कतई नहीं है कि वैक्सीन असरदार नहीं है। सिर्फ 20 से 30 प्रतिशत लोगों को टीका लगवाने के बाद बुखार आ सकता है। कुछ लोगों को पहली डोज लेने के बाद बुखार आ जाता है और दूसरी डोज के बाद कुछ नहीं होता। इसी तरह कुछ लोगों को पहली डोज के बाद कुछ नहीं होता, लेकिन दूसरी डोज के बाद बुखार आ जाता है। यह व्यक्ति के शरीर की सिस्टम पर निर्भर करता है।


ना ही कोविड-19 वैक्सीन से प्रजनन क्षमता पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। किसी भी वैक्सीन में इस तरह का कोई बुरा असर नहीं होता। इस तरह का कुप्रचार लोगों में गलतफहमी पैदा करता है। वैक्सीन का मुख्य ध्येय शरीर को कोरोना वायरस से बचाना है, अपने परिवार और समाज को बचाना है। लिहाजा, सबको आगे बढ़कर टीका लगवाना चाहिये।


और एक बात की वैक्सीन की दोनों खुराकें लेने के बाद भी संक्रमण हो सकता है। लेकिन ऐसे मामलों में रोग निश्चित रूप से हल्का होगा और गंभीर रूप से बीमार होने की संभावना लगभग नहीं होगी। सोचिए अगर 45 साल के ऊपर के लोगों को टीका न लगा होता, तब तो दूसरी लहर में मृत्यु दर की कल्पना भी नहीं की जा सकती। अब दूसरी लहर समाप्ति की ओर है। इसका श्रेय टीकाकरण को ही जाता है।


बच्चों को भी संक्रमण हो सकता है, लेकिन वे गंभीर रूप से बीमार नहीं पड़ते। बहरहाल, बच्चों से वायरस दूसरों तक पहुंच सकता है। लिहाजा, बच्चों को भी टीका लगाया जाना चाहिये। तो वैक्सीन के विरुद्ध फैलाई जाने वाली भ्रामक अफ़वाहो से दूर रहें और जितना जल्दी हो सके पूरे परिवार सहित वैक्सीन लगवा लें ताकि इस महामारी से पूरा देश जल्दी निज़ात पा सकें।


(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु

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