क्या आप भूलने लगी हैं?

क्या आप भूलने लगी हैं?

क्या आपको ऐसा लगता है कि आप पहले से अधिक भूलने लगी हैं? यदि उम्र के साथ यह कभी कभार होने लगा है तब तो चिंता करने जैसी कोई बात नहीं है, परन्तु यदि यह अक्सर होने लगा है और आप छोटी बड़ी बहुत सी बातें भूलने लगी हैं तो आज से ही ध्यान देना प्रारंभ करें।


यह सच है कि बचपन की यादें जितनी गहरी व अमिट होती हैं वैसी अमूमन बड़े होने पर नहीं रह पातीं। बड़ी उम्र में भी हमारे बचपन की बहुत सी यादें हमारे मस्तिष्क में स्पष्ट हैं जबकि कुछ दिनों और महीनों पहले की बातें हम याद नहीं रख पाते। यह एक सामान्य बात है।

परंतु यदि आप अक्सर मिलने जुलने वालों के नाम भूलने लगें या एक ही बात को कई कई बार लोगों को बताने लगी हों तो सावधान होना ही चाहिए।


यह भूलने की बीमारी जब गंभीर रूप ले लेती है तो अल्जाइमर के नाम से जानी जाती है और पीड़ित व्यक्ति कभी कभी तो अपने खास परिचितों को भी भूल जाता है।


परंतु अच्छी बात यह है कि विदेशों की तुलना में हमारे देश में इस बीमारी से जूझने वालों की संख्या कम है।


याद्दाश्त अच्छी रखने के लिए क्या करें-


मस्तिष्क का अधिक से अधिक प्रयोग करें

इसके लिए दिमाग तेज रखने वाले खेल व पहेलियाँ सुलझाने जैसे खेल खेलना चाहिए।


गैजेट्स का प्रयोग थोड़ा सीमित करने का प्रयास करें। आजकल जितना ही सुविधाजनक जीवन होता जा रहा है उतना ही हम इन पर निर्भर हो रहे हैं। चीजें याद रखने के स्थान पर गूगल का प्रयोग करते हैं, रास्ते याद रखने के स्थान पर मैप का। ये तो केवल उदाहरण हैं, सच्चाई यही है कि हम अपने मस्तिष्क का उपयोग सीमित करते जा रहे हैं।

हम मोबाइल में इतना गुम हैं कि जरूरी काम के बीच भी बार बार मोबाइल देखना हमारी दिनचर्या में शामिल है। सिर्फ युवा नहीं बल्कि बड़ी आयु के लोग भी ऐसा ही कर रहे हैं। और ऐसा करने से सबसे अधिक हानि यही है कि कोई भी कार्य हम कर नहीं रहे बल्कि निबटा रहे हैं। जब कार्य करने के स्थान पर निबटाया जाता है तो हम कभी भी उसमें अपना 100 प्रतिशत नहीं देते हैं।


बच्चों को भी मोबाइल पर गेम्स कम खेलने दें। उसके स्थान पर दिमागी कसरत वाले खेल खिलाइए।


खानपान-

भारतीय भोजन में जिन मसालों का प्रयोग होता है वह स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत अच्छे हैं। शायद यह भी एक कारण है कि हमारे देश में भूलने की बीमारी विदेशों की अपेक्षा कम है। खासतौर पर हल्दी व दालचीनी का प्रयोग भोजन में होना ही चाहिए।

विटामिन बी1 व बी 12 की कमी न होने दें।


हरी पत्तेदार सब्जियों के अतिरिक्त ब्रोकली, गोभी ,केले टमाटर ब्लूबेरी ब्लैकबेरी आदि का सेवन करें।

भीगे हुए बादाम, अखरोट, कद्दू के बीज आदि का सेवन मस्तिष्क के लिए लाभदायक है।

ओटमील व मोटे अनाज का प्रयोग करें।

मछली व अंडे का सेवन लाभदायक है।


व्यायाम-

किसी भी प्रकार का व्यायाम आपके जीवन का अभिन्न अंग होना ही चाहिए।

योग व प्राणायाम, खुली ताजी हवा में सैर कुछ भी अपनाइए पर अपनाइए अवश्य।

धूप का सेवन करें। धूप आपको स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक है।


अच्छी और भरपूर नींद लेने से हमारी सोचने समझने की क्षमता पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है। थका हुआ दिमाग पुनः तरोताजा हो जाता है।


नारियल के तेल और देशी घी का भोजन में उपयोग करें साथ ही इसे सिर की मालिशके लिए भी प्रयोग करें।


धूम्रपान व शराब के सेवन से बचें

फास्ट फूड व प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम से कम करें।

अवसाद व चिंता से दूर रहने का यथासंभव प्रयास करें।


अर्चना सक्सेना

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