क्या आप श्री पीताम्बरा पीठ दतिया के बारे में जानते हैं ?

क्या आप श्री पीताम्बरा पीठ दतिया के बारे में जानते हैं ?

 #श्री पीताम्बरा पीठ, दतिया (मध्यप्रदेश )

 "ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्व दुष्टानाम वाचं मुखम पदम स्तम्भय।

  जिव्हां कीलय बुद्धिम विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा ।." 

 

क्या आप श्री पीताम्बरा पीठ, दतिया के बारे में जानते हैं..। आइये हम आपको आज एक शक्ति पीठ,पूजा स्थल,श्री पीताम्बरा पीठ के बारे में, कुछ जानकारी देते हैं..।


मध्य प्रदेश के झाँसी शहर से लगभग उनतीस किलोमीटर दूर दतिया शहर हैं,। दतिया एक प्राचीन शहर हैं.। जिसका उल्लेख राजा दंतवक्र द्वारा शासित महाभारत में मिलता हैं..।ये शहर एक तीर्थस्थान भी हैं.। यहाँ जाने के लिये, ट्रेन से झाँसी या ग्वालियर जाना पड़ता हैं.। वहाँ से दतिया के लिये, बस, या कार से जा सकते हैं...। कुछ ट्रेन दतिया स्टेशन पर ही रूकती हैं.। पंजाब मेल और ताज एक्सप्रेस, झेलम एक्सप्रेस आदि..।      


दतिया के रेलवे स्टेशन से, तीन किलोमीटर दूर, ये शक्ति पीठ मंदिर हैं..। इस पीठ में वनखण्डेश्वर शिव मंदिर भी हैं, जो महाभारत के समय का माना जाता हैं, और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा प्रमाणित किया गया हैं.।


श्री पीताम्बरा पीठ(बगलामुखी ) एक प्रसिद्ध शक्ति पीठ हैं,।कहा जाता हैं कि कभी इस स्थान पर शमशान हुआ करता था,लेकिन आज एक विश्व प्रसिद्ध मंदिर हैं।., कोई भक्त यहाँ श्रद्धा से माता से कुछ मांगता हैं,तो वो अवश्य प्राप्त होती हैं..। माँ पीताम्बरा शत्रु नाश की देवी हैं। भगवती बगलामुखी का बाल्य रूप का मंदिर हैं ये .। कहा जाता हैं कि माँ पीताम्बरा देवी, दिन में तीन बार अपना रूप बदलती हैं.. इनका स्वरुप रक्षात्मक हैं।इनकी आराधना करने से साधक को विजय प्राप्त होती हैं.।श्री पीताम्बरा बगलामुखी के मंदिर में आने वाले भक्तों से प्रसाद के रूप में पैसा नहीं लिया जाता हैं.।यहाँ स्त्रियों को साड़ी में दर्शन करने को मिलता..।       


पीताम्बरा पीठ के प्रांगण में ही" माँ धुमावती देवी" का मंदिर हैं।जो भगवती धुमावती का एकमात्र मंदिर हैं...।ये पार्वती जी का एक रूप हैं।इस मंदिर को श्री स्वामी जी द्वारा आश्रम में स्थापित किया गया था.। धुमावती मंदिर में सुहागन और सौभाग्यवती स्त्रियों का प्रवेश निषेध हैं, माई का रूप अत्यंत क्रूर माना गया..।


कहा जाता हैं कि एक बार माई को भूख लगी थी,तो वे अपने पति को खा गई थी।जो धूम्र यानि धुएँ के रूप में उनके मुख से निकले... इसलिए उनका धुमावती पड़ा.। धुमावती में प्रसाद मीठा नहीं, नमकीन समोसा,कचौड़ी चढ़ता हैं, क्योंकि माई को तामसी भोजन पसंद हैं ..।शनिवार को धुमावती माई के दर्शन को भीड़ उमड़ी पड़ती..।आठ शनिवार दर्शन करने से सभी मनोकामना पूरी होती हैं।






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