क्या आपको अधिक क्रोध आता है?

क्या आपको अधिक क्रोध आता है?

क्या आपको भी क्रोध अधिक आता है? क्या अक्सर बिना सोचे समझे कुछ भी बोल कर मन ही मन पछतावा होता है?


पहले तो समझना होगा कि क्रोध है क्या? क्रोध एक भावना है , एक संवेग है और यह कम या अधिक रूप में हर किसी में मौजूद है परंतु यह बहुत कुछ हम पर निर्भर करता है कि हम क्रोध पर नियंत्रण कर सकें या क्रोध के नियंत्रण में हो जाएँ।


क्रोध के लिए वैसे तो मस्तिष्क का एक एंजाइम भी वजह होता है परन्तु फिर भी क्रोध पर नियंत्रण काफी अधिक हमारे ही हाथ में है।

क्रोध किसी पर भी आ सकता है, परिचित हों या अपरिचित, अपने हों या पराये। दरअसल यह कुछ असफलताओं, कुंठाओं और अवहेलनाओं का परिणाम भी है। यदि किसी व्यक्ति की बात को महत्व नहीं दिया जाता या जानबूझकर उसे नीचा दिखाने का प्रयत्न किया जाता है और यह लंबे समय तक होता रहता है तो परिणाम क्रोध के रूप में सामने आता है।


हमारे समाज में जिन महिलाओं को अक्सर परिवार में महत्व नहीं दिया जाता उनके स्वभाव में भी हीनभावना के साथ क्रोध भी उपजने लगता है।


परन्तु क्रोध के पीछे कारण जो भी हों, सामने वाले के साथ साथ यह क्रोध करने वाले का नुकसान भी कम नहीं करता और कहीं कहीं तो सबसे ज्यादा नुकसान खुद का ही होता है।


क्रोध करने से दिल की धड़कन बढ़ जाती है, साँस तेज चलने लगती है, तनाव बहुत बढ़ जाता है। दिल के दौरे का खतरा बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त रक्तचाप बढ़ जाना, सिरदर्द, पाचन संबंधी समस्याएँ, त्वचा संबंधी समस्याएँ व नींद की कमी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है।

ये तो हुईं शारीरिक हानियाँ परंतु इनके अतिरिक्त संबंधों में खटास, विचारों में नकारात्मकता, चिंता व अवसाद ग्रसित रहना आदि भी शामिल हैं। कई बार तो हम बाद में स्वयं की नजरों में ही छोटा महसूस करने लगते हैं।


बचाव के लिए क्या करें?


क्रोध को शांत करने के लिए कुछ बातों पर ध्यान दीजिए।

1- जैसे ही क्रोध आए उसके कारण पर से ध्यान हटाकर कहीं और लगाने का प्रयास करें।

2- एक गिलास पानी पी लीजिए।

3- गहरी साँस लेना बहुत सी मानसिक समस्याओं का हल है। आप गहरी गहरी साँसे खींचिए।

4- अपने मन में एक से दस और फिर दस से एक तक गिनती गिनिए। सुनने में अजीब है पर कारगर है।

5- यदि क्रोध करना आदत में आ चुका है तो अपने आहार पर भी ध्यान दीजिए। सात्विक भोजन के सेवन से उद्वेग शांत रहते हैं जबकि तलेभुने मिर्च मसालेदार खाद्य पदार्थ आपको उद्विग्न बनाते हैं।

6- योग व प्राणायम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएँ। अवश्य लाभ होगा।

7- सुबह शाम ताजी हवा में टहलने से लाभ मिलेगा।

8- शरीर को विश्राम अवश्य दें। काम के अधिक बोझ और नींद पूरी न होने से भी क्रोध आता है।


कोई भी बुरी आदत या विकार हमारा तब तक नुकसान करेगा जब तक हम उसे करने देंगे। यदि हम चाहें तो दृढ़संकल्प व इच्छाशक्ति से किसी भी अन्य विकार या रोग की भाँति इससे भी छुटकारा पा सकते हैं।


अर्चना सक्सेना

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