खामोश हो गई स्वर कोकिला !

खामोश हो गई स्वर कोकिला !

नहीं रहीं स्वर कोकिला लता मंगेशकर, हमेशा के लिए टूट गई 'जिंदगी की लड़ी' अलविदा #LataMangeshkar

आज 6 फरवरी का दिन पूरे देश के लिए बहुत दुखद रहा जब खबर आई स्वर कोकिला लता मंगेशकर हम सबके बीच नहीं रहीं।

वो पिछले 28 दिनों से अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही थी  उन्होंने 92 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया है।

लता मंगेशकर वो नाम है, जो अपनी सुरीली आवाज के कारण भारत ही नहीं पूरी दुनिया में सुर साम्राज्ञी और भारत की स्वर कोकिला के रूप में  जानी जाती हैं। अपने सात दशक लम्बे सुरों के सफर में उन्होंने तकरीबन सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं में हजारों गाने गाए ।

लता जी ने हिंदी, मराठी, उर्दू, संस्कृत सहित 36 भाषाओं में गीत गाए ।


लता मंगेशकर को अनेक प्रतिष्ठ नागरिक सम्मानों और संगीत पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। लता जी को मिले प्रमुख पुरस्कार एवं अलंकरणों की सूची इस प्रकार है।
1969 पद्म भूषण
1989 दादा साहब फाल्के पुरस्कार
1996 राजीव गांधी सद्भावना पुरस्कार
1999 पद्म विभूषण
2001 भारत रत्न

अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता रहा लता मंगेशकर जिनकी आवाज की सारी दुनिया कायल है, उन्होंने शादी क्यों नहीं की। इस बारे में स्वयं लता जी ने कई जगह साक्षात्कार में कहा है कि पिताजी के गुजर जाने के बाद सबसे बड़ी बेटी होने के कारण घर-परिवार चलाने की जिम्मेदारी मुझ पर आ गई। छोटे भाई-बहनों के जीवन के बारे में सोचने में इतनी व्यस्त रहीं कि खुद की शादी के बारे में फैसला करने का समय ही नहीं मिला।

देश की शान और संगीत जगत की शिरमोर स्वर कोकिला भारत रत्न लता मंगेशकर जी का निधन बहुत ही दुखद है। उनको हमारी भावभीनी श्रद्धांजलि। उनका जाना देश के लिए अपूरणीय क्षति है।

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