खानदान का मान या बच्चों की खुशियां-आप किसे चुनेंगे ?

खानदान का मान या बच्चों की खुशियां-आप किसे चुनेंगे ?

"कमाल की बात है, आज सभी नियम बदल गए... अब खानदान की इज्जत पर कोई आंच नहीं आ रही... आज परवरिश पर सवाल नहीं उठाये जाएंगे... क्योंकि आज बहू की बेटी नहीं बल्कि बेटी की बेटी की खुशियों का सवाल है, बहू और बेटी को एक जैसा समझने का ढिंढोरा पीटने वाले आज खामोश है... पोती को घर से निकालने वाले आज नातिन की खुशियों का उत्साह मना रहे है" यशोधरा की आवाज गुस्से से गूंज रही थी।

"भाभी, आप प्लीज एक बार मेरी बात सुन लीजिये, वो मन्नू को आप अच्छे से जानती है, उसने मरने की धमकी दी... इसलिये उसकी बात माननी पड़ी" ननद काम्या यशोधरा का गुस्सा शांत करने के लिए आगे आयी, लेकिन आज यशोधरा का गुस्सा सातवें आसमान पर था।

"मामी जी! आप मुझे आशीर्वाद नहीं देंगी " मन्नू हाथ जोड़ कर यशोधरा के सामने खड़ी हो गयी।

मन्नू को सामने देख यशोधरा का गुस्सा थोड़ा कम हो गया और उसकी आवाज में ममता आ गयी और आगे बढ़ कर मन्नू को गले लगा लिया,"तेरी मामी तुझसे कैसे नाराज हो सकती है बल्कि मैं तो बहुत खुश हूं कि तुझे अपना मनभावन जीवनसाथी मिल रहा है और कोई फर्क नहीं पड़ता कि तुम उससे बड़ी हो या वो तुमसे छोटा। सबसे अहम बात है कि दोनों ही प्यार, विश्वास और समर्पण की डोर थामे रहे...एक दूसरे के लिये दिल में बहुत इज्जत हो। सदा सुहागन रहो मेरी बच्ची!!!" फिर सबकी तरफ देखते हुए बोली,"नाराजगी मुझे इन बड़े लोगों से है... क्रोध मुझे इन पर है। जिन्होनें मुझे खानदान से अलग कर दिया क्योंकि मेरी बेटी ने प्रेम विवाह कर लिया था। एक तुगलकी फरमान जारी किया था कि अगर मेरी बेटी ने प्रेम विवाह किया तो यह लोग मुझे खानदान से अलग कर देंगे और मेरी परवरिश पर सौ सवाल खड़े कर दिये थे।"

यशोधरा की बात सुनकर सभी की नज़रें नीची हो गयी। आज किसी के चेहरे पर कोई गुस्सा या क्रोध नहीं था। क्योंकि जानते थे कि यशोधरा उस दिन भी सही थी जब अपनी बेटी के प्रेम विवाह को उसने खुशी-खुशी मंजूर कर लिया था और आज भी यशोधरा का उनके प्रति गुस्सा जायज है। उन लोगों ने गुस्से में गलत निर्णय लिया लेकिन यशोधरा गुस्सा होते हुए भी मन्नू के फैसले के साथ है।

"भाभी, हमें माफ कर दीजिए, हम समझ गए हैं कि बच्चों के फैसले के आगे हम मजबूर हो जाते है और फिर उनकी खुशियां सभी नियमों से बढ़ कर हो जाती है। बिना बात की गहरायी को समझे बिना गुस्सा करना सिर्फ रिश्तों में दूरियां लाता है। आज मैं हम सभी की तरफ से आपसे माफी मांगती हूं और यह भी कि उस दिन क्रोध में हमारा लिया फैसला भी गलत था" काम्या ने रोते हुए यशोधरा के पैर पकड़ लिया।

यशोधरा ने गुस्से को अपनी पोटली में बंद किया और काम्या को भी माफ करते हुए गले लगा लिया।

क्रोध में किया गया फैसला सिर्फ और सिर्फ दुख और तकलीफ और रिश्तों में दूरियां देता है।


अर्पणा जायसवाल

#नवरसक्वीन (6)

रौद्र रस- क्रोध

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