खुशियों की चाबी,नन्ही गुड़िया

खुशियों की चाबी,नन्ही गुड़िया

" यह क्या अनर्थ कर दिया तुमने बहू ...!! अपने यहां बेटियों की कमी थी तो एक और लड़की को उठाकर ले आई ? तुम्हारी पहले से ही दो बेटियां हैं तो ये तीसरी किस खुशी में ? लाना ही था तो लड़का लाती ...!! अच्छा अब समझी मैं अपने भाई के सर से बोझ हल्का करना चाहती है, तुम्हारा भाई तो बेशर्म है कुछ कमाता-धमाता नही है और अपनी पत्नी के साथ पूरे दिन रंग रैलियां मनाता है ये उसी का नतीजा है यह सब ...!! पर मेरे घर में यह सब नही चलेगा, तुम अभी इसी वक्त तुम्हारे मायके छोड़ आओ" रमा जी ने आग बबूला होते हुए अपनी बहू सीमा से बोली।

"जी मांझी, सब कुछ जानती हूं कि मेरी पहले से दो बेटियां हैं और एक बेटी का भार हम उठा नही सकते। पर आप ही बताइए मांझी की उसकी मां जन्म देते हुए ही चल बसी और अभी तक उसके पिताजी होश में आए नही है और मेरे माता-पिता भी नही है जो इस दूधमुंही बच्ची को संभाल सके ।

इस लिए इन्सानियत के नाते ही मैं अपने घर इसे ले आईं, मैं उसे अपना दूध पिला दूंगी फिर मैं ही उसे वापस उसके घर छोड़कर आ जाऊंगी" रोते हुए सीमा ने कहा।

रमा जी कुछ नही बोली तो सीमा उसे अपने कमरे में ले गई और अपना दूध पिलाने लगी, दूध मिलने पर भूख शांत होते ही बच्ची चुप हो कर सो गई।

बच्ची चुप होते ही उसे सुलाकर सीमा काम में लग गई,अब अक्सर ऐसा होता कि रमा जी पूजा करती और उनके पति अखबार पढ़ते उस वक्त सीमा उस नन्ही सी जान को दोनों के पास सुलाकर अपना काम करती। शुरुआत में तो रमा जी उसकी तरफ ध्यान भी नही देती थी कभी-कभी तो सीमा काम कर रही होती तब बच्ची ने बिगाड़ा होता या उसे भूख लगी होती तो वो रोने लगती, रमा जी सीमा को पुकारती। सीमा को आने में देर होती तो रमा जी के पति उन्हें कहते," छोटी सी जान है जरा देख लो कुछ नहीं होता। बच्चे तो भगवान का रूप होते हैं और सब अपना-अपना भाग्य लेकर आते हैं।"

एक दो बार ना-नुकुर करके रमा जी बच्ची को चुप कराने लगी अब धीरे धीरे वो नन्ही सी जान रमा जी के दिल में बसने लगी। उसकी मासूम सी हंसी और भोली सी सूरत पर रमा जी अब वारि जाती।

आठ महीने के बाद सीमा ने उसे अपने मायके छोड़कर आने की बात कही पर अब तक वो मासूम बच्ची पर रमा जी का दिल जीत लिया था तो उन्होंने मना कर दिया और कहा," मेरी ये मुस्कान कहीं नहीं जायेगी वो हमारे साथ यही रहेगी। उसके आने से तो मेरा घर खुशियों से भर गया है और इसका नाम ही खुशी ही रखूंगी क्योंकि वो खुशियों की चाबी जो है।"

सीमा भी तो यही चाहती थी क्योंकि उसे भी तो खुशी से एक अलग लगाव जो हो गया था। सासू मां की बात सुनकर वो खुशी से झूम उठी और इतने सालों में पहली बार वो अपनी सासू मां के गले लग गई कुछ सोचे-समझे बिना ...!!!

 # पिंक एक्सपर्ट

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