खुशियों का यू टर्न

खुशियों का यू टर्न

"हैलो दीदी क्या हाल हैं?"

रीना के हैलो कहते ही दूसरी तरफ से उसकी छोटी बहन रेणु की खनकती हुई आवाज सुनाई दी।

"बस सब ठीक है यार तू सुना"

"अरे इतने उदास स्वर में क्यों बोल रही हो। कैसी तबीयत है अब आप लोगों की? सब ठीक तो है ना दीदी?"- रेणु ने चिंतित स्वर में पूछा।

"हां अब हमारी तबीयत तो ठीक ही है"

"फिर! मेरी दीदी हमेशा खिलखिलाती हुई ही अच्छी लगती है"

"सब तरफ इतना डर का माहौल है तो कैसे हंसी आएगी? जहां देखो वहां कोई ना कोई अपना बीमार है, कोरोना ने तो हाहाकार मचा रखा है"

रेणु समझ गई कि रीना चारों तरफ के इस निराशा और भय के माहौल में रीना अब धीरे धीरे अवसाद की ओर जा रही है। उसने बात बदलते हुए कहा -

"दीदी तुमने योग और प्राणायाम फिर से शुरू किया कि नहीं"

"अरे कहां यार। कुछ करने का मन ही नहीं होता है। आंखे बंद करो तो डरावने विचार आने लगते हैं"

"दीदी ऐसे कैसे काम चलेगा। थोड़ा योग और प्राणायाम करोगी तो दिनभर बहुत अच्छा लगेगा"

"अब तू फिर से मत शुरू हो जाना। मुझसे अब नहीं हो पाता है। वो दिन इतिहास हो गए सब मॉर्निंग वॉक, योग और प्राणायाम किया करते थे"

"जब पहले होता था तो अब तो होना ही चाहिए। दिन में बाद 15-20 मिनट ही तो निकालने हैं। दीदी योग और प्राणायाम हमें शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने में बहुत मदद करते हैं"

"रेणु कहने और करने में बहुत फर्क होता है"- रीना ने गहरी सांस लेते हुए कहा।

"दीदी हम रोज करते हैं इसीलिए कह रहे हैं"

"पर यार अकेले करने का मन ही नहीं होता"

"तो चलो साथ में मिलकर कर लेते हैं"- रेणु ने हंसते हुए कहा।

"अभी घर से बाहर निकलना मुश्किल है, कहीं पार्क या गार्डन में जा नहीं सकते, तू अलग शहर में, मैं अलग शहर में… फ़ालतू की मजाक मत कर"- रीना ने झल्लाते हुए कहा।

"दीदी ये मजाक नहीं सच कह रही हूं। हम चारों तो रोज सुबह करते ही हैं कल से तुम भी वीडियो कॉल पर हमें ज्वाइन कर लेना"

"अरे वाह ये तो बहुत अच्छा आइडिया है पर मुझे बहुत अच्छे से नहीं आता"

"चिंता क्यों करती हो दीदी, मेरे पतिदेव हैं ना। वो आपको प्राणायाम करने का सही तरीका सिखा देंगे" - रेणु ने उसे आश्वस्त किया।

"और इस बहाने हम रोज सुबह सबसे पहले आपस में एक दूसरे से वीडियो कॉल के जरिए मिल भी पाएंगे" - रीना के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई।

"ये हुई ना कुछ बात। वही तो दीदी। आम के आम और गुठलियों के भी दाम"

दोनों बहनें खिलखिलाकर हंस पड़ीं। रीना शायद बहुत दिनों बाद इतना खुलकर हंसी थी। रेणु ने अपने पति संदीप जी से बात की। वो इसके लिए सहर्ष तैयार हो गए साथ ही उन्होंने परिवार के अन्य सदस्यों और मित्रों को भी साथ में जुड़ने का निमंत्रण दे दिया।

इस तरह उनकी रोज सुबह वीडियो कॉल पर प्राणायाम की क्लास शुरू हो गई। धीरे धीरे लोग जुड़ने लगे। संदीप जी अलग अलग तरह के प्राणायाम और उनको सही तरीके से करने की विधि समझाने लगे। प्राणायाम से दिनभर तन और मन में स्फूर्ति तो मिलती ही थी साथ ही सुबह सुबह सभी परिवार जनों और मित्रों को स्वस्थ और कुशल देखकर आत्मिक संतोष भी।

रीना को अब रोज सुबह का बेसब्री से इंतजार रहता। सबके मुस्कुराते चेहरे मन में एक नई ऊर्जा और आशा का संचार करते थे। रीना ने अपने आप में बहुत परिवर्तन महसूस किया। वो अब फिर से खुश रहने लगी थी। प्राणायाम से उसके स्वास्थ्य में भी बहुत सुधार होने लगा।

योग और प्राणायाम ने रीना और सभी परिवारजनों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को सुधारने में बहुत मदद की।

दोस्तों ये समय सभी के लिए बहुत कठिन है पर जरूरत है हौसला बनाए रखने की और दूसरों को हौसला देने की। जैसा रेणु और संदीप जी ने किया। उनकी एक छोटी सी पहल ने सभी परिवारजनों और मित्रों को एक साथ समय बिताने का, अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने का अवसर दिया। जिससे सभी को अवसाद से उबरकर अपने जीवन को फिर से हंसी खुशी से जीने की राह मिली।

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