खतरों की खिलाड़ी, मेरी बिटिया प्यारी! #सर्दियोंकीगर्माहट

खतरों की खिलाड़ी, मेरी बिटिया प्यारी! #सर्दियोंकीगर्माहट

चार-पांच साल‌ पहले का एक मजेदार वाकया बताती हूॅ॑। जाड़ों की बात है, दिसंबर का महीना चल रहा था, हम सभी रात के खाने के बाद रजाई में घुसकर टेलीविजन का आनंद उठा रहे थे। सामने चल रहा था शो, खतरों का खिलाड़ी...

हम सभी यानि मैं, मेरी सासु मां, पतिदेव, बेटी मिलकर खतरनाक स्टंट्स का मजा उठा रहे थे। साथ-साथ में कभी आसमान से हेलीकॉप्टर वाले स्टंट्स को देखकर दांतों तले उंगली दबा रहे थे, प्रतिभागी लोग कभी अजीब-अजीब चीजें खा रहे थे तो कभी सोलह पहियों वाले ट्रोले में स्टंट्स परफार्म कर रहे थे। मेरी बेटी आठ साल की थी तो उसे बहुत रोमांचक लग रहा था और क्योंकि हम उस सीरियल को पहले एपीसोड से फाॅलो कर रहे थे तो अब तक सबके कोई न कोई फेवरेट कंटेस्टेंट भी बन गए थे।
अचानक देखते-देखते मेरी बेटी बोली," मम्मी, मैं तो रोज़ाना खतरों के खिलाड़ी खेलती हूॅ॑।"
हम सभी के कान खड़े हो गए कि क्या कह रही है बेटी? ऐसा तो नहीं जब शाम को वो सोसायटी प्लेग्राउंड में खेलने जाती है तब बच्चे कुछ खतरनाक खेल या स्टंट वगैरह तो नहीं करने लगे हैं!
टेलीविजन वाल्यूम म्यूट कर पतिदेव ने पूछा," कैसे खतरों के खिलाड़ी , बेटा?"
सासु मां ने भी पूछा," बेबी, कौन से खतरनाक खेल?"
मैंने भी उतावली होकर पूछा," बेटा कौन से गेम्स? क्या खेलते हो, बेटा तुम लोग?"
बेटी मुस्कुराते हुए बोली," मम्मी, प्लेग्राउंड में नहीं घर पर! आप और दादी मिलकर डेली खतरों के खिलाड़ी गेम खिलाती हों!"
मेरा और मांजी का मुंह खुला का खुला रह गया, दोनों एक साथ बोले," हम कौन सा खतरों के खिलाड़ी खिलाते हैं, बेटा?"
पतिदेव की समझ में भी कुछ नहीं आ रहा था, बेटी मजे से पापा की गोद में बैठ कर बोली," पापा, मम्मी और दादी डेली के डेली अजीब-अजीब, तरह-तरह की सब्जियां बनाती हैं और आपकी रानी बेटी सब बिना नखरे किए खा  लेती है तो हुई ना मैं रोज़ाना खतरों के खिलाड़ी खेलने वाली। मम्मी और दादी की सारी सब्जियां खाना खतरों के खिलाड़ी खेलने से कम नहीं है, कभी पालक तो कभी मेथी कभी गोभी तो कभी बंदगोभी और कभी-कभी तो शलगम भी... मैं तो रोज़ाना खतरों के खिलाड़ी खेलती हूॅ॑।"
बेटी की बातें सुनकर हम सभी को लगने लगा हमारी बेटी वास्तव में खतरों का खिलाड़ी है जिसे तरह-तरह की सब्जियां खाकर स्टंट्स पास करने पड़ते हैं।
हम सभी जोर से हंस पड़े हमारे चुलबुली बेटी की दास्तान सुनकर... सर्दियों का मौसम तो होता ही है ताजी-ताजी पत्तियों वाली सब्जियां और अधिक वैरायटी की सब्जियां वाला...दरअसल बेटी को खाने के पौष्टिक गुणों के बारे में बताकर सभी प्रकार की सब्जियां खाने को प्रेरित किया हम सबने शुरुआत से ही और उसने कभी परेशान नहीं किया।

बेटी का खतरों का खिलाड़ी किस्सा आज भी मुस्कान खिला जाता है।
-प्रियंका सक्सेना
(मौलिक व स्वरचित)

(मजेदार किस्सा)

#सर्दियोंकीगर्माहट

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