खुद को साबित करो

खुद को साबित करो

“क्या करती रहती हो तुम अब तक खाना भी नहीं बना, आराम करने की आदत पड़ गई है ”
बाहर निकल कर कमाकर लाना पड़ता तो पता चलता कि कितनी मेहनत करनी पड़ती है।”
बड़बड़ाते हुए पति अभिनव गिलास का पानी ऊठाकर पीने लगा।
ये एक दिन का नहीं रोज का किस्सा हो गया था। पति हो या सास सब प्रिया पर चीखते और झल्लाते हुए ही नज़र आते थे।

प्रिया खुले विचारों की पढीलिखी लड़की थी। पारंपरिक परिवार में शादी के बाद उसे नौकरी भी छोड़नी पड़ी। अब केवल रसोई तक उसका जीवन सिमित रह गया।
ऊपर से ताने और दोषारोपण भी होते रहते। अपनी मर्जी से पसंद का खाना भी नहीं बना सकती, वो भी पूछकर ही बनाना पड़ता।
जब कुछ सालों बाद उसके बच्चों को भी उसके खिलाफ भड़काना शुरू कर दिया गया कि ये प्रिया कुछ नहीं करती। बस घर के काम निपटा कर दिनभर आराम करती है। तो सुन सुनकर पक चुकी प्रिया ने आखिरकार
खुद को कोसना शुरू कर दिया कि क्यों अपनी नौकरी छोड़ दी। वो भी सास ससुर के संस्कारों की दुहाई देने के कारण।
प्रिया ने अब फिर से नौकरी करने का निर्णय लिया।
पति व सास के विरोध करने पर भी वह डटी रही कि अब मुझे अपने अस्तित्व को बचाने के लिये घर से बाहर कदम रखना ही होगा।
बच्चे भी अब मां का पल्लू छोड़कर स्कूल जाने लगे थे। और ज्यादा समय दादी के साथ गुजारते थे।
इसलिए प्रिया ने सोचा की अगर कामकाजी महिला का ही संसार में अस्तित्व है, मान है। वो ही कुछ करती है, घरेलू औरत कुछ नहीं करती। तो मैं भी बाहर निकलकर फिर से काम करके दिखा सकती हूं कि हां मैं भी कुछ हूं और कुछ करती भी हूं। और 10 साल के बाद फिर से प्रिया धूल फांक रहे अपने पढाई के प्रमाणपत्रों को सहेजने लगी।
पहले तो उसके निर्णय को सुनकर सास ने आपत्ति जताई की “घर का काम कैसे होगा”
तो प्रिया ने कहा कि मां जी बहुत सारा काम तो आप ही कर देती हैं। कुछ काम के लिए मैं एक कामवाली रख देती हूँ। और चिंता कैसी मेरे घर में नहीं रहने से ज्यादा फर्क तो पड़ेगा भी नहीं। क्योंकि वैसे भी मैं करती ही क्या हूं, दिन भर आराम करने के अलावा।”
अभिनव भी प्रिया के तर्क सुनकर मना नहीं कर पाया क्योंकि मां और बेटा दोनों का एक ही डायलाग होता था कि “प्रिया दिनभर आराम ही तो करती है। काम कहां करती है कुछ”

प्रिया ने अपनी पक्की दोस्त जो एक कंपनी में सीनियर मैनेजर बन चुकी थी से बात की और अपने पढाई और पुराने काम के अनुभव के बल पर नौकरी हासिल कर ली।
हालांकि सास और पति दोनों का मुंह पहले दिन ही लटक गया और दोनों ने उससे नौकरी नहीं करने का अनुरोध किया पर प्रिया नहीं मानी। अब उसकी आंखे खुल चुकी थीं। और वह फिर से अपने पैंरों पर कुल्हाड़ी नहीं मारना चाहती थी।
आपको ये कहानी कैसी लगी जरूर बताएं। क्योंकि अमूमन हर घर में नौकरी नहीं करने वाली बहू पर यही इल्ज़ाम लगाया जाता है कि तुम करती क्या हो, सारा दिन घर पर आराम ही तो करती हो”

आपकी दोस्त
स्नेहलता उपाध्याय

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