लम्हें यादों की

लम्हें यादों की

काश बीते हुए लम्हे वापस आ जाते उन लम्हों को फिर जी लेती मैंअब उन लम्हों के बिना जीना गंवार नहीं..!!"

दिल की हर धड़कन में तेरी याद बसी है। कैसे भूल जाऊं उन लम्हों को जो तेरे संग बिताए थे। आज 6 सालों के बाद मालिनी के अंदर छिपे दर्द आंखों से बयां होते हैं। जब वो अपने प्रेमी अनुभव से मिलती है। अचानक हुई इस मुलाकात ने मालिनी को उसके अतीत की और धकेल दिया।

आज भी याद है मुझे जब मैंने पहली बार अनुभव को अपने कालेज में देखी। उसकी पहली झलक ने मेरे दिल पर अपनी छाप छोड़ दी थी। उसके बाद हर एक पर मेरी निगाहें उसे ही ढूंढती और जब टकराती तो खुद बा खुद शर्म से झुक जाती। अनुभव भी मुझे पसंद करते थे। जैसे मैंने मन ही मन उनके लिए ना जाने कितने सपने बुन लिए थे उनका भी वही हाल था। धीरे धीरे हम दोनों की दीवानगी सर चढ़ कर बोलने लगी थी पर उसकी भनक किसी को ना थी सिर्फ हम दोनों के सिवा के। पढ़ाई के बहाने हम दोनों एक दूसरे के साथ वक्त बिता लेते थे। पर अब तक हम दोनों ने एक दूसरे से अपने दिल की बात कही नहीं थी डर था कहीं खो देने का। पर मेरी किस्मत की लकीरों में मेरे मोहब्बत की लकीर खींचना भूल गई थी। और जैसे अचानक मेरी जिंदगी में अनुभव आये वैसे ही अचानक चलें भी गए हमेशा के लिए। उस पल से लेकर आज तक उसी के प्यार भरे लम्हें के सहारे जी रही हूं। "तभी मालिनी कहा खोई हो।" अनुभव ने पूछा। मालिनी "नहीं कहीं नहीं, आज इतने सालों बाद अचानक से सामने तुम्हें पाकर मैं अतीत में खो सी गई थी पर मैं अब हकीकत में लौट आई हूँ।

मालिनी की बातों से अनुभव को उसके दिल का दर्द साफ उसकी आंखों में झलक रहा था। तब भी वो मुस्कुरा कर अनुभव से बात कर रही है। "तुमने शादी कर ली??"अनुभव मालिनी से पूछता है। तब मालिनी बिना कुछ कहे ना में अपने सिर को हिलाती है। और दबी आवाज में अनुभव से पूछती है और तुम ने शादी कर ली???? तब अनुभव कहता है "हां मैंने ‌शादी कर ली।" उसकी बातों को सुनकर मालिनी ने और भी कुछ पूछना चाहा पर अपने आप को रोक लेती है। तभी अनुभव मालिनी से कहता है "मैं तुमसे माफी मांगना चाहता हूं मेरी वजह से तुमने बहुत कुछ सहा तुमने अपनी जिंदगी में किसी को भी मेरी जगह नहीं दी। आज भी तुम अकेले जिंदगी जी रही हो।"

"तुम से किसने कहा की मैं अकेली हूं। मेरे साथ मेरा परिवार है। जो मेरे लिए जीतें और मैं उनके लिए। तुम मुझसे माफ़ी क्यों मांग रहे हो। तुमने ऐसा क्या कर दिया। मेरी जिंदगी में तुम्हीं जगह जो पहले थी आज भी वही है सिर्फ जान पहचान की साथ में पढ़ाई करने की और उससे ज्यादा कुछ नहीं।" मालिनी अनुभव को कहती है। "पर तुम तो प्यार करती थी ना मेरे से" अनुभव कहता है। क्या मैंने तुमसे कभी कहा है नहीं ना तो फिर, तुम कौन होते हो ये सब सवाल करने वाले तुम तो सब कुछ छोड़ कर बीच सफर में छोड़ कर भाग गए थे। मालिनी गुस्से में कहती है।

आज मैं तुम्हें सब कुछ बताना चाहता हूं। अनुभव मालिनी को कहता है। तब मालिनी कहती हैं "बीते लम्हों में जाने का कोई मतलब नहीं है। जो अपने नसीब में था ही नहीं तो उससे शिकायत क्यों??? उन बीते हुए लम्हों को वैसे ही रहने दो। ना तुम से शिकायत पहले थी और ना आज है। जब रिश्ता ही नहीं तो शिकायत क्यों??? तुम पहले भी अजनबी थे मेरे लिए और आज भी अजनबी ही हो??? इतना कह कर मालिनी वहां से चली जाती है।

कभी कभी किसी प्रेम कहानी की शुरूआत होए बिना ही उसका अंत हो जाता है अगर कुछ साथ रहता है तो उस पल संग बिताए हुए खूबसूरत लम्हों की यादें।

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