लोक डाउन वाली वो एनिवर्सरी

#एकपिकनिक१

 उस दिन करीब 12:00 बजे सभी घर से एकजुट होकर गांव के एक शनि मंदिर और उससे लगे बगीचे पर पहुंचे। खास बात यह थी कि अभी हमारी में पिकनिक टीम में सिर्फ महिलाएं थी ,वह भी हर पीढ़ी, हर उम्र की। गौशाला की गायों के लिए वही से घास खरीदी उन्हें खिलाई थोड़ी सेवा की और शनि मंदिर के दर्शन करके हमने अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना प्रारंभ किया। धीरे धीरे रंग जमने लगा। लॉकडाउन से सभी अनलॉक हुए ।फिर अंताक्षरी ,पासिंग द पिलो, और चेयर रेस,का ओर फिर सभी ने डांस का मजा उठाया ।घर की जिम्मेदारियों से दूर उस दिन सब एक साथ बड़े दिनों बाद खासतौर से चारों पीढ़ी की महिलाएं खुलकर, खिलखिला कर हंस रही थी, किसी भी बंधन से दूर अपने बचपन को जी रहे थे। किसी भी बंधन से दूर दादी से लेकर पोतिया और पोता बहु तक समान भाव से हर रंग के गीत और डांस पेश कर रहे थे। खूब मजा आ रहा था ।रंग और चड गया जब 5:00 बजे घर के सारे जेंट्स खाना बना कर लाए और अपने हाथों से परिवार की सभी महिलाओं को सर्व किया उसके बाद खुद ने खाया ।कार के म्यूजिक सिस्टम पर शाम की पूरे परिवार की मस्ती देखने लायक थी, जब दादू और दादी भी खुद को नहीं रोक पाए ।जाते हुए सभी ने ईश्वर को धन्यवाद दिया परिवार की यह मस्ती यूंही कायम रहे और हमारे परिवार का संप कभी कम ना हो। लोकडॉउन में घर में रहकर सभी उ ब चुके थे। हॉटल , मॉल, सभी वॉटर पार्क बिल्कुल बंद थे। इसी बीच हमारी एनिवर्सरी आई और हमें यह मौका मिला कि हम एक बार फिर जुगाड़ ढूंढ कर अपने जीवन के कुछ पल उस पिकनिक के बहाने पूरी मौज मस्ती के साथ मना पाए। हम भारतीयों में एक बात होती है कि हम हर मौके में एक अवसर तलाश कर ही लेते हैं लेकिन यह मस्ती भरी ,मंदिर के पिकनिक वाली वाली शादी की सालगिरह मुझे हमेशा याद रहेगी।

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