"मैं जैसी हूॅ॑, अच्छी हूॅ॑!" #बाॅडीशेमिंग #ThursdayPoetryChallenge

"मैं जैसी हूॅ॑, अच्छी हूॅ॑!" #बाॅडीशेमिंग #ThursdayPoetryChallenge


खाना पीना कम करो,
डाइटिंग एक्सरसाइज करो,
तुम कितनी मोटी हो गई हों!
या खाने को नही मिलता क्या?
कुछ खाया पीया करो,
माचिस की तिल्ली लग रही हों!
होंठ तुम्हारे कितने मोटे हैं!
या ठोड़ी कितनी छोटी है!
अच्छा, चश्मा भी लगाती हों!
देखो ऑ॑खें कितनी छोटी है!
या उसकी नाक कितनी सुतवां‌ है,
तुम्हारी तो जैसे रोटी पर घुइयां धरी है!
रंग फलाने की लड़की का देखो,
कैसा गुलाबी आभा लिए है,
एक तुम्हारी बेटी मानो
कोयले का ढेर पड़ा हो!
कभी नाटी रह गई बिटिया तुम्हारी,
अब कैसे करोगे हाथ पीले इसके!
या फिर यह तो लम्बी हो गई ताड़ जैसी
अब क्या शादी होगी मीनार से इसकी!
काली, सांवली,मोटी, पतली,
ठिगनी, नाटी, लम्बी, बलकटी
और भी न जाने क्या-क्या?
चेहरे को हर कोण से परखकर
तानों की बरसात करते हैं।
स्ट्रेच मार्क्स देख तो मुंह फेर लिया करते हैं!
नख-शिख घूर-घूरकर, काया पर  कमेंट करते हैैं।
छलनी कर देते हैं, तन-मन और आत्मा को
आत्मविश्वास हिलाने में कसर न कोई रखते हैं,
ये तथाकथित ठेकेदार समाज के कहलाते हैं।

न समझे खुद को हीन कि
कमियां सभी में होती हैं।
तारीफ़ अपनी खुद कर डालिए,
गुणों का बखान स्वयं कर लीजिए।
नजरअंदाज करिए
लोगों के रिमार्क्स को।
कि लोगों का काम है कहना
कुछ तो लोग कहेंगे।
दूरी बना लें जो करें टिप्पणी
अनर्गल, आपकी देह-वेशभूषा पर।
चलने-फिरने के तरीके पर,
बोलने के सलीके पर।
परफेक्ट तो कोई नहीं है दोस्तों,
फिर क्यों कर हम सुनें?
न सहो तन के ऊपर अपने तुम,
फ़िज़ूल के उपदेश।
बाॅडी शेमिंग करने न पाए कोई,
ऐसी हिमाकत करने न पाए,
इतना किसी को बढ़ावा न दों कि
देह को छील दें, तार-तार कर दे,
अपनी भद्दी भाषा से,
तानों के बाणों से।
अपने को मजबूत बनाओ,
कहो, मैं जैसी हूॅ॑ अच्छी हूॅ॑!
सलाह-मशवरा, राय प्रवचन की,
आपसे मुझे नहीं कोई जरुरत है!
अपनेआप से करें प्यार,
दें खुद को आदर व सम्मान,
गलत बात का , अप्रिय भाषा का
दर्ज करें विरोध पुरजोर शब्दों में!

-प्रियंका सक्सेना
(मौलिक व स्वरचित)

#बाॅडीशेमिंग
#ThursdayPoetryChallenge

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