मां की आंखें

मां की आंखें


उम्र के इस पड़ाव पर आकर जाना है
राज मां की आंखों का,
खुद मां बन के एहसास हुआ
आज मां के जज्बातों का ।
क्यों मुझे उदास देखकर कारण ढूंढती थी वो आंखें,
क्यों मुझे खिलखिलाता देख कर मुस्कुरा जाती थी वो आंखें, क्यों मेरे गिरने पर शरीर पर चोट ढूंढती थी वो आंखें,
क्यों मेरे हाथों में इनाम देखकर
खुशी से छलक जाती थी वो आंखें,
क्यों उन आंखों में उत्तर था
मेरी हर अनसुलझी बातों का,
उम्र के इस पड़ाव पर आकर जाना है
राज मां की आंखों का।
क्यों कभी देर हो जाने पर प्रश्न करती थी वो आंखें,
क्यों कहीं जाने से पहले मेरी नजर उतार लेती थी वो आंखें, क्यों मेरे बीमार हो जाने पर सो नहीं पाती थी वो आंखे,
क्यों मेरे खाना ना खाने पर
झूठे गुस्से से बड़ी हो जाती थी वो आंखे,
क्यों बन जाती थी वो आंखें
सहारा मेरी डर की काली रातों का,
उम्र के इस पड़ाव पर आकर जाना है
राज मां की आंखों का।

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