माँ की मौत और इन्सानियत

माँ की मौत और इन्सानियत

''हैलो,पापा आप सब कैसे हैं? मम्म्मी कैसी है?''

दादी को जरा फोन देना पापा,"दादी प्रणाम !आप कैसे हो? मैं ठीक हूं ।आपने या पापा ने मम्मी को कुछ खिलाया पिलाया?"

''नहीं ,मैं क्यों जाऊं तेरी मम्मी को खिलाने पिलाने।''

"ठीक है! मैं शाम तक पहुंच रही हूं।''

''क्यों ,क्यों आ रही हो?"

''आप दोनों ने जो नहीं किया वह मुझे करना है।''

बेटी प्रेरणा बोली जो बहुत ही बेरोकटोक बातें करती हैं ।शाम तक प्रेरणा पहुंच गई ।आते ही मां वसुधा से गले लग गई ।

प्रेरणा..... नानी.... कह वसुधा बेटी के गले लग रोने लगी।लगा जैसे नदी का उफान किनारा तोड़कर बाहर निकल आया हो।कब से मन में दबा दुख आंसुओं के रूप में बहता गया। बेटी ने रो लेने दिया।

''पापा और दादी आप लोगों को नानी के गुजर जाने का पता है।''

''हां, महाराष्ट्र में कोरोना का प्रकोप इतना अधिक है कि मम्मी वहां जा नहीं पाई।''

''क्या आप दोनों में से किसी ने भी अपनी संवेदना व्यक्त की। उनके दुख में शामिल हुए। किसी ने अपना कंधा दिया कि वे रो कर अपना दुख हलका कर सकेें।

क्या आप में से किसी ने भी कहा "आज सारे काम रहने दो !खाना मत बनाओ! तुम्हारा मन ठीक नहीं है! कुछ दिन बाहर से मंगा कर काम चला लेंगे !

आप में से किसी ने भी उनके मन को समझने की कोशिश नहीं की। उन्होंने अपनी मां खोई है....मां !!उनकी मन:स्थिति कैसी रही होगी? सुबह से भूखी प्यासी रोए जा रही है ।पर आप लोगों के लिए बना भी रही हैं ।

आप लोगों से इतना ना हो सका कि उसे गिलास पानी ही पिला दे ।क्यों दादी आप अगर मां को पूछ लोगे या कुछ खिला दोगी तो क्या आप छोटी हो जाओगी ?आप अभी इतने भी अक्षम नहीं है कि कुछ कर ना पा ओ। और पापा आपकी सुख दुख की साथी को आप समझ ना पाए ।क्या मम्मी सिर्फ आपकी सुख दुख की साथी है आप नहीं??

मानवता इंसानियत है या नहीं?? मुझे तो अपने आप पर शर्म आ रही है। मां को लिए जा रही हूं अपने साथ ।आप लोग अपना काम खुद करें।''

दादी या पिता में से किसी को भी प्रेरणा को बोलने का साहस न था क्योंकि वह बिल्कुल सच कह रही थी।गलती उन दोनों से ही हुई है।

#पिंक एक्सपर्ट#

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