मां की दी हुई जादू की पुड़िया

मां की दी हुई जादू की पुड़िया

सुबह बड़ी ही तेज़ी से बीत जाता था । पति और ससुर जी काम पर निकल जाते थे और बच्चे स्कूल चले जाते । सासू मां से बातें करते - करते कैसे सारे काम निपट जाते मंजरी को पता ही नहीं चलता था ।


मंजरी का परिवार ज्यादा बड़ा तो नहीं था मगर बहुत प्यारा परिवार था । मंजरी का सुखी संसार देख कर उसकी सारी सहेलियां उससे जलती थी । अक्सर ही उसकी सखियां कहती यार हमारी सासू मां तो इतनी प्यारी नहीं है तेरी कैसे है ? हमारे पति तो हम पर जान नहीं छिड़कते तेरे कैसे ?


मंजरी कुछ ना कहती बस मन ही मन मुस्काया करती और अपनी मां की दी हुई जादू की पुड़िया के बारे में सोचती अगर मां ने शादी के वक़्त वह पुड़िया उसे ना दी होती तो आज मंजरी इतनी खुश ना होती ।


एक बार मंजरी की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई । सुबह घर के सारे काम निपटाने के बाद से ही उसे बहुत कमज़ोरी महसूस हो रही थी , सर भी दर्द से फटा जा रहा था और बदन बुखार से तप रहा था ।


मंजरी की सास ने जब मंजरी को बाहर वाले कमरे में नहीं देखा तो वह सोच में पड़ गई कि मंजरी इस वक्त तो कभी अपने कमरे में नहीं होती और घर के सारे काम ख़त्म करके रोज़ उनके साथ चाय पिया करती है , सासू मां जब मंजरी के कमरे में आई तो मंजरी को लेटा देख बहुत घबरा गई , जल्दी से उन्होंने उसका माथा छुआ तो देखा मंजरी को तेज बुखार था ,


उन्होंने जल्दी ही बेटे को फोन कर घर पर बुला लिया । मंजरी डॉक्टर के पास गई तो अत्यधिक दुर्बलता और तेज बुखार होने के कारण डॉक्टर ने मंजरी को अस्पताल में ही भर्ती कर लिया । अब घर का सारा काम मंजरी की सांस पर आ गया था , जब से मंजरी उस घर में बहू बनकर आई थी उसने अपनी सास को एक भी काम नहीं करने दिया था बस उनकी सेवा ही की थी।


मंजिल की सास बहुत थक जाया करती , उनकी उम्र भी हो गई थी जिसके कारण उनको घुटनों में दर्द रहता था और न जाने कितनी ही तकलीफें हुआ करती थी । वो वैसे तो मंजरी से बहुत प्यार करती थी मगर कभी मंजरी की मदद नहीं किया करती थी । सोचती मैंने भी तो अपनी जवानी के दिनों में पूरा घर अकेले संभाला था तो मंजरी कौन सा अनोखा काम कर रही है । जिसके चलते उनकी आदत भी छूट गई थी ।


एक हफ़्ते बाद मंजरी घर आ गई मगर अभी भी उसे थोड़ी बहुत दुर्बलता थी , वो थोड़ी देर काम करने के बाद ही थक जाया करती थी । मगर सास से कुछ ना कहती ।


मंजरी को बस अपनी मां की कही हुई बात याद आती जो उन्होंने उसे शादी से पहले कही थी..... मंजरी ससुराल में इज्ज़त चाहती है तो सदैव सबसे प्रेम और अपनत्व का भाव रखना और सबसे महत्वपूर्ण अपनी सास को सदा खुश रखना , सारी उम्र उन्होंने वह घर संभाला है अब तू वह घर संभालना और उनकी खूब सेवा करना । वह खुश होंगी तो तेरा पति भी खुश रहेगा क्योंकि हर बेटा यही चाहता है कि उसकी मां सदैव खुश रहे । इसके साथ ही अपने ससुर जी का भी ध्यान रखना वह तेरे पिता समान है । इन सभी बातों को मंजरी ने जादू की पुड़िया समझ कर अपने मन मस्तिष्क में बिठा लिया था ।


मंजरी ने अपने मां के कहे अनुसार ही पूरे परिवार को खुश रखा था और सभी उससे बहुत प्रेम भी करते थे । मगर इस वक्त वो अपनी सास से मदद चाहती थी । उसके शरीर में इतनी ताकत ना होती कि अकेले घर के सारे काम कर सके । आखिरकार परेशान होकर एक दिन मंजरी ने अपनी सास से मदद मांग ली , सासूजी उस वक्त तो कुछ ना बोली मगर मुंह फुला कर सारा दिन घूमती रहीं ।


बेटे के आने के बाद उसके बहुत पूछने पर उन्होंने उसे मंजरी के बारे में बताएं । उन्होंने अपने बेटे से कहा अगर बहू के रहते मुझे ही घर का काम करना पड़े तो उसकी क्या ज़रूरत ? बेटे ने हंसते हुए मां को समझाया । हमारी शादी के दस साल हो गए मां , आज तक मंजरी ने तुमसे कोई काम नहीं कराया और तुम उसकी प्रशंसा किए बिना भी नहीं थकती थी , आज जब वो थोड़ी सी बीमार हो गई है तो तुम्हें उसकी सहायता करनी चाहिए । वह भी तो हम सब का कितना ख्याल रखती हैं । मंजरी भी तो इस घर का हिस्सा है और मैं उसे ब्याह कर काम कराने के लिए तो नहीं लाया , वह तो मेरी जीवनसंगिनी है मेरी सुख - दुख की साथी अगर आपको इस उम्र में तकलीफ होती है तो मैं उसकी मदद कर दिया करूंगा ।


दूसरे दिन से मंजरी के पति ने उसके साथ मिलकर सारे काम निपटाने शुरू कर दिए, यह देख कर ससुर जी और बच्चे भी उनकी मदद करने लगे , सास को भी अपनी गलती का एहसास हो चुका था वो भी काम में हाथ बटाने लगी ।


यह सब देखकर मंजरी बहुत खुश थी क्योंकि उसकी मां की दी हुई जादू की पुड़िया ने कमाल कर दिया था , दस साल निस्वार्थ भाव से मंजरी ने सबकी सेवा की थी और सबको भरपूर प्रेम दिया था , आज उसका फल उसे मिल रहा था ।

मंजरी ने मन ही मन अपनी मां को धन्यवाद कहां और उनके साथ काम में लग गई ।


धन्यवाद



What's Your Reaction?

like
4
dislike
0
love
1
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0