मां ममता का सागर है

मां ममता का सागर है

#मेरीमां


एक महिला अपने जीवन में पत्नी, बेटी, बहू जैसे ना जाने कितने रिश्ते निभाती है, लेकिन इन सभी रिश्तों में से जिस रिश्ते को सबसे ज्यादा सम्मान प्राप्त है वह "माँ" का रिश्ता है।


मां एक शब्द नहीं बल्कि सम्पूर्ण ब्रह्मांड इसमें समाया हुआ है। देवताओं को भी मां के स्नेह के लिए पृथ्वीलोक पर आना पड़ा। मां के रूप में साक्षात भगवान हमारे पास रहते हैं। बच्चे कितने भी बड़े हो जाएं परन्तु मां के लिए मानों आज भी हम छोटे बच्चे ही हैं और सदैव रहते हैं।


मातृत्व वह बंधन है जिसको हम शब्दों में नही कह सकते है। माँ अपने बच्चे को जन्म देने के साथ ही उसके लालन-पालन का भी कार्य करती है। कुछ भी हो जाये लेकिन एक माँ का उसके बच्चों के प्रति स्नेह कभी कम नही होता है, वह खुद से भी ज्यादा अपने बच्चों की सुख-सुविधाओं को लेकर चिंतित रहती है।


ईश्वर हमसे नाराज हो जायेगा लेकिन एक माँ अपने बच्चों से कभी नाराज नही हो सकती है। यही कारण है कि हमारे जीवन में माँ के इस रिश्ते को अन्य सभी रिश्तों से इतना ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है।


वो कहते है न "माँ" शब्द अपने आप में परिपूर्ण है दुनिया में हम चाहे कितने भी रिश्ते से क्यू न बधे हुए है लेकिन माँ के

बिना हमारा जीवन अधुरा होता है। हर रिश्ते को आप से कुछ पाने की आस रहता है लेकिन माँ और संतान के बीच एक ऐसा रिश्ता है जो एक माँ अपनी संतान को जीवनपर्यन्त सिर्फ देना जानती है । माँ भूखी सो सकती है लेकिन कभी भी अपने संतान को भूखे पेट सोना सपने में भी नही देखना चाहती है ।


अपने मायके में सबसे छोटी बेटी होने के कारण मुझे शुरू से ही सबका बहुत ज्यादा प्यार मिला।मां से मैंने बहुत कुछ सीखा है। उनके हाथ में जो हुनर था, वो किसी में नहीं। खासकर उनके हाथ के सिले कपड़े, जिनको पहनकर ही मैं बड़ी हुई। मां ने वो सबकुछ मुझे भी सिखाया। उनकी सिखाई सिलाई के कारण ही मेरे ससुराल वाले मेरी बहुत तारीफ करते हैं और उनका श्रेय भी मेरी मां को ही जाता है।


मां के कितने रूप हैं। कभी मां दोस्त बन जाती हैं, कभी मां गुरु बन जाती हैं, तो कभी मां देवी बन जाती हैं। जब भी मैं कॉलेज से आती तो मां आते ही अपने पास बैठाकर हवा करने लगती हैं। मां के हाथ के पंखे की हवा मुझे कूलर से भी ठंडी लगती और मां के हाथों से बनी रोटी का स्वाद का तो कहना ही क्या? जब कोई खाने वाली चीज बाजार की होती तो मां उसे छिपाकर मेरे लिए रख लेतीं और स्वयं न खाती तो मुझे मां से बड़ा कोई नहीं लगता।


मुझे आज भी याद है जब मैं मां बनी थी उस समय दर्द मुझे होना और मेरी मां का रातभर न सोना ।मैं मां के प्यार को कभी नहीं भूल सकती ।वास्तव में मां का प्रेम निस्वार्थ होता है। अब हम मां के पास कम ही जा पाते हैं बस फोन पर ही बात हो जाती हैं।


उनका आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ है। मम्मी के लिए बस यही कहना चाहती हूं-

तू कितनी अच्छी है, तू कितनी भोली है, प्यारी प्यारी है ओ मां, मेरी मां।


आइ लव यू मां।

#मेरी मां

Seema Praveen Garg





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