मां जैसी मेरी सास

मां जैसी मेरी सास

आज सुबह से ही अविका को उल्टी पर उलटी हो रही थी। उल्टियां करते-करते वह थक गई थी। सास अनुजा को घर में नन्हे मेहमान की आगमन की अनुभूति हो रही थी। अनुजा जी बार- बार अविका को नींबू पानी दे रही थी। पानी पीने के बाद अविका फिर उलटी करने लगती।

उसकी हालत देखकर उन्होंने बेटे शुभ से कहा कि आज ऑफिस से छुट्टी लेकर अविका को डॉक्टर के पास ले जाए।

मां आज मेरी जरूरी मीटिंग है इसलिए आज मेरा जाना बहुत जरूरी है । आप अविका को लेकर डॉक्टर के पास चले जाइए। शुभ ने कहा...


ठीक है बेटा ! मैं चली जाऊंगी अविका को लेकर।
डॉक्टर से दोपहर का अपॉइंटमेंट लेकर अनुजा जी अविका को अस्पताल लेकर जाती है। डॉक्टर ने जब कहा कि अविका मां बनने वाली हैं तो सुनकर दोनों सास बहू ख़ुश हो गई।

डॉक्टर ने पहले तीन महीने क्या क्या एहतियात बरतना है समझाया और दवाइयां दी। अविका और शुभ की शादी को दो साल हो गए थे। शादी के एक साल बाद से ही अनुजा जी दादी बनने की इच्छा जाहिर कर रही थी और आखिरकार उनकी इच्छा पूरी होने जा रही थी।

अनुजा जी बहुत खुश थी।वो अविका का बहुत ध्यान रखती। अविका मां बनने वाली थी इसलिए उसे मॉर्निंग सिकनेस का एहसास होता । वो सुबह  सुबह  उठ नहीं पाती थी । कुछ खाती तो उसे पचता नहीं और उल्टी कर देती।

अनुजा जी उसका हाल समझ रही थी इसलिए आज-कल सुबह उठकर वही सबके लिए नाश्ता  बनाती। अविका को ये सब अच्छा नहीं लगता इसलिए वो बार-बार रसोई में आकर सास का हाथ बंटाने लगती।

अनुजा जी मना करती फिर भी अविका नहीं मानती। शादी के बाद से ही अविका ने घर की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली थी। अनुजा जी मना भी करती कि इतनी जल्दी क्या है बेटा मेरे हाथ पैर भी तो सही सलामत हैं जब तक चल रहे हैं तब तक मुझे भी कुछ कर लेने दो ‌

पर अविका उनकी एक ना सुनती । सुबह वो अनुजा जी को उनकी सहेलियों के साथ टहलने पार्क में भेजती , महीने में एक बार वो उनकी सहेलियों को चाय नाश्ते पर बुलाती और हर मंगलवार भगवान के कीर्तन-भजन के लिए मंदिर भी भेजती थी।

अनुजा जी को अविका की आदत हो गई थी  जिसके बिना उनका गुज़ारा होना मुश्किल था। आज अविका मां बनने वाली हैं और हार्मोन में बदलाव के कारण उसकी खुद की तबियत ठीक नहीं रहती इस स्थिति में अनुजा जी सास होने के फर्ज निभा रही थी।

अविका का तीसरा महीना शुरू हो गया था ‌। अविका पहले से ठीक थी मगर उल्टी अभी भी एक दो बार जरूर हो जाती थी जिसके कारण अविका को हमेशा सुस्ती छाई रहती। उसकी ऐसी हालत देखकर अनुजा जी ने घर की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली।

घर काम में की अधिकता के कारण अनुजा जी ब्यस्त रहती जिसके कारण उनका अपनी सखी सहेली से मिलना जुलना कम हो गया था।

एक दिन अचानक उनकी सभी सहेलियां बिना बताए उनसे मिलने घर पर आ गई। अपनी सहेलियों को देखकर अनुजा जी बहुत खुश हुई। उस दिन अविका की तबियत ठीक नहीं थी इसलिए वो अपने कमरे में आराम कर रही थी। सास की सहेलियां आई हैं सुनकर अविका सास की मदद करने के लिए रसोई में आती है।

अनुजा जी अविका को वापस आराम करने के लिए उसके कमरे में भेज देती है और खुद अपनी सहेलियों के लिए नाश्ता पानी का इंतजाम करने लगती है। अनुजा जी जब हाथ में चाय की ट्रे लिए सहेलियों के पास जाती हैं तो सारी सहेलियां उनको घूर घूर कर देख रही थी ‌।

क्या हुआ अनुजा ? आज कल हमसे मिलने पार्क में नहीं आ रही हो, हमें अपने घर भी नहीं बुला रही और मैं और कीर्तन-भजन में भी नहीं आ रही हो... ऐसा क्या हो गया है। और ये क्या तुम्हारी बहु अविका कहां है जो तुम हमारे लिए ये सब लेकर आई हो।"आज-कल घर के सारे काम तुम ही करती हो"?

अपनी सहेलियों की बात सुनकर अनुजा जी थोड़ी परेशान हो जाती हैं। वो अपनी सहेलियों को चाय पीने का इशारा करती हैं और कहती हैं वो अविका मां बनने वाली हैं ,उसकी तबियत ठीक नहीं रहती इसलिए घर के कामों में मैं उसकी मदद कर देती हूं।

अरे ये क्या बात हो गई! मां बनने वाली हैं , कोई हम माएं नहीं बनी हैं? ये आज-कल की बहुओं ओ ना बस आराम करने का बहाना चाहिए। मां बनने वाली हैं , तबियत ठीक नहीं रहती ‌।चलो इसी बहाने सास के सर पर जिम्मेदारी  देकर आराम कर लिया जाए।
"तुम भी इतनी सीधी हो न अनुजा की जल्दी सबके झांसे में आ जाती हो। लगाम लगाओ अपनी बहु पर मां बनने वाली हैं कोई बड़ी बीमारी से ग्रस्त नहीं हुई है कि आराम करती रहे। सारी सहेलियां एक साथ अनुजा जी को बोल रही थी।

उनकी बात सुनकर अनुजा जी अपनी सहेलियों के सामने हाथ जोड़कर खड़ी हो गई और कहा...तुम सब मेरी अच्छी सहेलियां हो , मुझे तुम सब लगाव है लेकिन आज जो तुम सब मिलकर मेरे ही घर में बैठकर मुझे मेरी बहू के खिलाफ उल्टी सीधी बातें सुना रही हो, इसे मैं कतई बर्दाश्त नहीं करूंगी।

मैं दादी बनने वाली हूं सुनकर तुम्हें मेरे साथ मिलकर मेरी खुशियों को और बढ़ाना चाहिए था मगर तुम सब...... कहते कहते अनुजा जी की आरती आंखें नम हो गई। अपनी सहेली का ऐसा रूप देखकर अनुजा जी की सहेलियां वहां से जाने में ही अपनी भलाई समझी पर जाते जाते ये भी कह गई की अनुजा हमारा काम था तुम्हें समझाना आगे तुम्हारी मर्जी।

सहेलियों के जाने के बाद अनुजा जी अविका के कमरे में गई । अविका उनकी सारी बातें सुन चुकी थी। वो नजरें झुकाए बैठी रही, अनुजा जी ने ‌देखा अविका के आंखों में आसूं भरे हुए थे। वो अविका के पास गई और अविका को गले लगाते हुए कहा , रो मत अविका मैं भी इस दौर से गुज़र चुकी हूं इसलिए मुझे पता है कि इस समय मां बनने वाली लड़कियों की मनोस्थिति क्या होती है।

तुम मेरी इन सहेलियों के बात पर भी मत ध्यान देना । इन जैसी सहेलियों के कारण ना जाने सास बहु के कितने रिश्तों की बलि चढ़ जाती है।

सास की बात सुनकर अविका उन को कस के पकड़ लेती है क्योंकि आज उसका विश्वास और भी पक्का हो गया था कि अनुजा सास के रूप में उसकी मां ही हैं।

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