माँ मुझे मत मारो

माँ मुझे मत मारो

 "माँ! मुझे मत मारो ।मैं तो तुम्हारा ही अंश  हूँ और कोई मुझे पसंद करे ना करे पर तुम तो मुझे प्यार करती हो ना! बताओ ना !"
"हाँ बेटा !मैं तुझे बहुत प्यार करती हूँ।आ जाओ मेरी गोद में मुझसे खेलने के लिए।"


" पर माँ कैसे आऊँ? तुमने तो मुझे मार ही डाला। अब दोबारा पता नहीं मेरी हिम्मत हो या ना हो तुम्हारे पास आने की।"
" ऐसा नहीं कहते बेटा! आ जाओ ।रुक जाओ बेटा! रुक जाओ......।"


" नैना! नैना! किस से बात कर रही हो? नैना! क्या हुआ बेटा?" "पापा! पापा !मेरा बेटी।"राकेश जी बेटी की हालत देख रो पड़े। "सुधा !सँभालो इसे ।मुझसे नहीं देखा जाता।"राकेश जी वहाँ से चले गए ।सुधा बेटी के पास आकर बैठ गई ।नैना फिर अपने होश खो बैठी थी।
"आप भी जाइए।मैं हूँ इनके साथ। "नर्स ने कहा।


"यह क्या किया हमने सुधा ?बेटी को कहाँ भेज दिया ?"दोनों एक दूसरे को थाम अपने आँसू नहीं रोक सके । लड़की की चाह में नैना के ससुराल वालों ने उसका  गर्भपात करवाया।वह कुछ न कर सकी। राजेश (पति )ने भी उसका साथ नहीं दिया। "नर्स !पापा  और माँ  को बुला दीजिए ।"थोड़ी देर बाद फिर उसे होश आ गया।


" अभी बुलाती हूँ।" नैना बिस्तर पर बैठ गई ।घर पर भी अस्पताल जैसा माहौल बना हुआ था।एक नर्स हमेशा उसकी देखभाल में लगी रहती।अचानक नैना को ऐसा लगा मानो उसमें किसी ने शक्ति भर्ती हो ।


"हाँ बेटा! बोलो! अब तबीयत कैसी है?" राकेश जी और सुधा दौड़े-दौड़े आए। सुधा जी प्यार से बेटी के सिर पर हाथ फेरने लगी और राकेश जी ने उसके हाथों को अपने हाथों में ले लिया।


" पापा !अब  रोने का समय नहीं है। मेरी बेटी ने इस दुनिया में ना आकर भी मुझे बहुत बड़ी सीख दी है ।अत्याचार करना और सहना दोनों गलत है। चुप रहकर मैंने खुद पर बहुत अत्याचार किया है। पहली बार में ही अगर मैंने उन सब की बातों का विरोध किया होता, अपनी चुप्पी तोड़ दी होती तो आज मेरा यह हाल ना होता। मैं जान गई हूँ  पापा! चुप रहना सही है पर सही समय पर बोलना भी चाहिए। राजेश और उसके परिवार ने मेरी कभी खोज खबर नहीं ली,न ही  मुझे लेने आए। ज्यादा तबीयत खराब होने पर दोष उन पर ना लगे इसलिए मुझे आप लोगों के पास भेज दिया। आप लोगों ने भी कुछ नहीं कहा ।अगर आप लोग मेरे साथ हैं तो मैंने एक फैसला लिया है।"


" हाँ बोलो बेटा!"
" मैं अब कभी उस घर वापस नहीं जाऊँगी और ना ही अपनी पहचान को मिटने दूँगी। मैंने राजेश को तलाक देने का फैसला किया है पापा ।अब मैं आत्मनिर्भर बनूँगी और हर बेटी को बचाने की दिशा में कार्य करूँगी। अब मैं और चुप नहीं रहूँगी।"


" हमें तुम पर गर्व है बेटा! हम दोनों तुम्हारे साथ हैं।"नैना अपने भविष्य को लेकर बहुत खुश थी और अपनी बेटी को ढेर सारी दुआएँ दे रही थी।अगर उसने थोड़ी सी हिम्मत दिखाई होती तो आज उसकी बेटी उसके साथ होती।

#येकैसीचुप्पी

डाॅ मधु कश्यप 

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