मैगी खाओगी

मैगी खाओगी

दुनिया का मुश्किल काम भी कर लूंगी परंतु भूखी नहीं रह सकती। ज्यादा भी नहीं खाती हूँ। लेकिन भूख बर्दाश्त नहीं होती। चक्कर आने लगते हैं। आंखों के आगे अंधेरा छाने लगता है, अगर दो रोटी पेट में न गयी तो। साथ की सहेलियां सोमवार और बृहस्पतिवार का व्रत रखती थी ,अच्छे पति की प्राप्ति के लिए। मुझे उनसे बहुत जलन होती थी कि भगवान इनसे खुश होकर इन्हें अच्छा पति देगा और मैं व्रत नहीं रख पाती , पता नहीं मुझे कैसा मिलेगा? कॉलेज में पूरी कोशिश करती थी उनका व्रत तुड़वाने की, मज़ाक भी बनाती थी उनकी । कॉलेज की कैंटीन में उनको बंद समोसा दिखाकर खाती थी। लेकिन उनका विस्वास देख मेरा आत्मविस्वास टूट जाता था। मेरा भी विस्वास व्रत में होने गया। घर वाले मेरी क्षमता जानते थे ।उनके विरोध के बावजूद व्रत रखा । बारह बजे के बाद ही पेट में तरह- तरह के वाद्य यंत्र बजने लगे। दो बजे तक बेहोशी की सी हालत हो गयी। तभी दाल छोंकने की खुशबू नाक में क्या गयी , पूरे शरीर के अस्थि पंजर डोलने लगे। और भूखी शक्तियां मेरे शरीर को खींच कर रसोई तक ले गयी। तब दिमाग मे उच्च विचार आया कि शरीर स्वस्थ रहेगा तभी अच्छा पति मिलेगा। फिर खा लिया।
…..विवाह हो गया। बहुत अच्छी बात ये थी कि हमारे यहां करवाचौथ का व्रत जरूरी नही था । लेकिन कुछ सालों बाद जब आस- पास की महिलाओं को सजा- धजा देखती तो मन में व्रत का कीड़ा फिर से काटने लगा। कुछ किटी पार्टीयों की सहेलियों ने भी फूँक में चढ़ा दिया कि “हो जाएगा व्रत, यूँ कट जाता है दिन।”………
सबके कहने से व्रत रखने का मन बना लिया । एक साथ सब सखियों ने मिलकर मेंहदी लगा ली।
पतिदेव की आंखों में भी गज़ब की चमक थी कि उनकी पत्नी ने उनके लिए व्रत रख रही है। साथ में बहुत डरे हुए भी थे। मेरी क्षमता से भली भांति परिचित थे। …” यार रख तो लोगी न पूरे दिन। बीच में छोड़ दिया तो! आख़िर मेरी जिंदगी का सवाल है।”……

…. दिन बढ़ने के साथ हालत खराब होनी शुरू हो गयी। लेकिन फीकी सी मुस्कान चेहरे से दिखा रही थी पतिदेव को। भूख के हतोड़े पेट से होते हुए सर पर पड़ रहे थे। थोड़ा और समय बिता तो पतिदेव भी धुंधले से दिखाई देने लगे।मैंने बिस्तर पकड़ने का सोचा। …
” क्या आज मुझे भी खाना नहीं मिलेगा दिन का?”………पतिदेव ने पूछा।

“मेरी हालत नहीं दिख रही ,खुद बना लो न जो खाना हो।मुझे तंग मत करो।”………

भूख ने चिड़चिडाहट का रूप ले लिया था ।..

“हद है! मैने बोला था क्या व्रत रखने को?”

……..पूरे घर में भटकते हुए जैसे -तैसे शाम हो गयी। सर, दर्द के मारे फटा जा रहा था। तभी पतिदेव की आवाज आई…..
“मैग्गी खाओगी ?…बना देता हूँ। इतने व्रत से अस्सी साल तो निकाल लूँगा।” …….
” प्लीज चुप रहो! सर में दर्द हो रहा है। कथा सुनने जाना है अभी।”
जैसे- तैसे साड़ी लपेटी ।थोड़ा बहुत साज श्रृंगार भी किया। लेकिन चेहरे का नूर गायब था। कदम लड़खड़ाते हुए पड़ रहे थे। तभी उल्टियां शुरू हो गयी। पतिदेव मैग्गी छोड़कर मेरी तरफ भागे। पकड़कर बिस्तर तक लाये।

” अब शादी के पाँच साल बाद क्या शौक चढ़ा था करवाचौथ के व्रत का । मुझे नहीं चाहिए ऐसा व्रत मेरे लिए। चलो कुछ खा लो.. मैग्गी लाऊं ?”……

दुबारा से मैग्गी सुनकर मैं बिस्तर में पड़ी-पड़ी चिल्लाने लगी। ” क्या मैग्गी-मैग्गी लगा रखा है एक घंटे से।”……

तभी मेरी सहेलियाँ आ गयी। और घर के बाहर ही पार्क में सभी पूजा करने बैठी । लेकिन कथा कब शुरू हुई और कब खत्म पता नहीं चला ।बेहोशी की सी हालत में घर तक पहुँच गयी। पतिदेव रसोई में अभी भी मैग्गी का पैकड पकडे खड़े थे।मुझे देखते ही उन्होंने पैकड छोड़ दिया और मेरे पास आ गए। तभी फिर से उल्टियां शुरू हो गयी। अब तो चला भी नहीं जा रहा था। आनन फ़ानन में वे खुद ही दवाई लेने भागे। और घर आ कर गुस्से में मुझे दवाई खिलाई , ग्लूकोस का पानी पिलाया। कुछ फल खिलाये। और सुला दिया। नींद नहीं आ पाई मुझे क्योकिं रसोई से कुछ आवाज़ आ रही थी। जब देखा तो पतिदेव डोंगा भर कर मैग्गी खा रहे थे।वो भी जल्दी जल्दी। मुझे देखकर हँसने लगे
“खाओगी?…. ….

तुमने अपने व्रत के चक्कर में मुझे भी भूखा मार दिया आज। सुबह से तुम अपने साज सृंगार में लगी थी। दिन में गुस्से से तुमने कुछ नहीं बनाया।जितनी बार अपने लिए मैग्गी बनाने लगता तुम्हारी तबियत ख़राब हो जाती। तुमसे निवेदन है आज के बाद ये करवाचौथ का व्रत बिल्कुल मत रखना । सज- धज लेना ,गिफ्ट भी ले लेना। परंतु मुझे भूखा मत मारना। इस जन्म  मे ये एक   व्रत  काफी है।”
मैंने भी हंसते हुए  चम्मच उठाई और उनके साथ मैग्गी खाने लगी। आज भी करवाचौथ के दिन साज श्रृंगार , कथा ,फोटोज़ सब होता है लेकिन भरपेट। और हां गिफ्ट भी मिल जाता है।

#कांटेस्ट
#मेरापहलाकरवाचौथ

धन्यवाद।
स्वरचित
सविता नेगी।

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