महंगाई का हुआ प्रमोशन

महंगाई का हुआ प्रमोशन

"सखी सैयां तो खूब ही कमात हैं, महंगाई डायन खाए जात है"


फिल्म ‘पीपली लाइव’ का यह गीत काफी लोकप्रिय हुआ था। इस गीत के माध्यम से एक प्रमुख सामाजिक-आर्थिक समस्या 'महंगाई' की ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया था ।

फिल्म 'पिपली लाइव' के इस गीत को गाया था फिल्म और थियेटर की दुनिया के जाने-माने अभिनेता रघुवीर यादव ने। 
आज भी इतने साल बाद महंगाई की मार से कराहते लोगों को गीत में अपना दर्द और  तकलीफों का एहसास होता है ।

लेकिन अब महंगाई  कुछ इस कदर अपने पैर पसार रही है जिसे देखकर लगता है कि महंगाई का प्रमोशन हो गया है अब महंगाई केवल डायन नहीं रही चुड़ैल बन गई है।

अब आप कहेंगे कि यह भी बता दीजिए कि डायन और चुड़ैल में क्या अंतर है?
कहा जाता है डायन नगर, गांव, बस्ती कहीं भी सामान्य लोगों की तरह रहती है जबकि चुड़ैल कब्रिस्तान में या उसके पास रहती है।
ऐसा ही कुछ हाल महंगाई का भी  है जो लोगों को पहले भी डरा रही थी पर लोग उस से लड़ते हुए अपना सामान्य जीवन जी रहे थे पर अब तो ऐसा लगता है जैसे महंगाई रूपी चुड़ैल लोगों को कब्रिस्तान पहुंचाकर ही दम लेगी क्योंकि जब गरीब आदमी की थाली में रोटी ही नहीं होगी तो वह क्या खाएगा और कैसे जियेगा?

इस वक्त देश में महंगाई अपने चरम पर है। पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कीमतों की वजह से इसका रुख लगातार ऊपर की ओर बना हुआ है। इससे स्वाभाविक ही लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। 

सरकारें एक-दूसरे को कोसती रह जाती हैं। कोई कहता है पुराने दिन ही भले थे, कोई अच्छे दिन की ढांढस बंधाता रह जाता है। लेकिन समस्या जत की तस मुंह बाय़े खड़ी है। 

लगातार बढ़ती महंगाई से खाद्य सामग्री की कीमतें बढ़ रही हैं और गरीब की थाली को खाली कर रही है। 

नींबू हो दाले हो चावल हो या फिर रसोई गैस सिलेंडर हर कोई जैसे मुंह चिढ़ाता सा  प्रतीत होता है।
पर सरकार और नेताओं को इस से क्या ?

इसलिए आप तो बस गाते रहिए
"सखी सैयां तो खूब ही कमात हैं, महंगाई डायन खाए जात है"

 और बढ़ती महंगाई को देखकर अफसोस जताइए और अपने मन को बहलाते रहिये ।
और हो सके तो खुशी भी मनाइए कि महंगाई का प्रमोशन हो गया है ।

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