महिलाओं की उम्र के आधार पर प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है?

महिलाओं की उम्र के आधार पर प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है?

समाज में हम कई बार देखते है की शादी के कुछ सालों बाद भी किसी दंपत्ति को बच्चा नहीं होता तो घरवाले और रिश्तेदार सबसे पहले बहू को ही जिम्मेदार ठहराते है, या सबसे पहले बहू का परीक्षण ही करवाया जाता है की क्या तकलीफ है जो बच्चा नहीं हो रहा। दर असल प्रजनन अक्षमता केवल महिलाओं की समस्या नहीं है। बल्कि यह महिलाओं और पुरुषों को समान रूप से प्रभावित करती है।


वैश्विक स्तर पर लगभग 32 प्रतिशत मामलों में समस्याएं पुरुषों से जुड़ी हो सकती हैं, और 32 प्रतिशत मामले महिलाओं से जुड़े हो सकते हैं। 17 प्रतिशत मामलों में दोनों से ही जुड़े मुद्दे कारण होते हैं। करीब 19 प्रतिशत दंपत्तियों के मामलों में प्रजनन अक्षमता के कारणों का पता नहीं चल पाता।


महिलाओं की उम्र के आधार पर प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है? महिलाओं में 30 की उम्र के आसपास प्रजनन क्षमता कम होने लगती है। 35 साल की उम्र के बाद तो यह और अधिक तेजी से घटने लगती है। जैसे-जैसे महिला की उम्र बढ़ती जाती है, उसके गर्भवती होने की संभावना घटती जाती है और प्रजनन अक्षमता उत्पन्न होने की संभावना बढ़ती जाती है।


महिलाएं 35 साल की उम्र में भी प्राकृतिक तौर से गर्भाधान कर सकती हैं और गर्भवती होने पर स्वस्थ शिशु को जन्म भी दे सकती हैं। पर 35 साल की उम्र के बाद प्रजनन अक्षमता, गर्भपात या शिशु में समस्याओं का सामना करने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ती जाती है। 40 साल की उम्र तक आते-आते गर्भधारण की इच्छा रखने वाली पांच में से केवल दो महिलाएं ही सफल हो पाती हैं।


महिलाएं आमतौर पर जिस उम्र में इन विट्रो फर्टिलाइजेशन करवाती हैं, वह औसत उम्र भी बढ़ती जा रही है। इससे पता चलता है कि प्रजनन अक्षमता उम्र की वजह से बढ़ती जा रही है। हालांकि, 40 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में आई.वी.एफ. उपचार की सफलता दर कम ही है और पिछले दशक से इसमें कोई खास बढ़त नहीं देखी गई है।

वैसे देखा जाए तो, 35 साल की उम्र से पहले ही माँ बनना बेहतर होता है।


महिलाओं की तुलना में पुरूषों में काफी लंबे समय तक जननक्षमता बनी रहती हैं। हालांकि, पुरुष प्रजनन क्षमता भी समय और उम्र के साथ घटती है, मगर इसकी घटने की दर काफी धीमी होती है।


कई पुरुष 50 से 60 साल के बाद भी जननक्षम रह सकते हैं, मगर पुरुषों में शुक्राणु से जुड़े विकारों का अनुपात उम्र के साथ बढ़ने लगता है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों में प्रजनन क्षमता घटने की दर काफी धीमी रहती है। पुरुष प्रजनन क्षमता में कमी का असर होने वाले शिशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। तो पुरुष और महिला दोनों में प्रजनन क्षमता एक सी नहीं होती और अगर किसी दंपत्ति को बच्चे नहीं हो रहे उसकी वजह सिर्फ़ महिला को ही नहीं ठहराया जा सकता पति पत्नी दोनों की जाँच करवाने पर सही कारण पति चलता है। 


(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु


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