मैं पूछूं तो साला करैक्टर ढीला है !

मैं पूछूं तो साला करैक्टर ढीला है !

चलिए अब बच्चों को थोड़ा अकेले में बात करने छोड़ देते है , इन दोनों को ही फैसला करना है। अपनी चाय का आखिरी घूंट भरते हुए श्यामनन्द जी (लड़के के पिता ) ने दुबे जी (लड़की के पिता ) से फ़रमाया। अब बस राकेश और सुधा कमरे में रह गए थे। राकेश ने बात करना शुरू किया - अच्छा तो आप बैंगलोर जॉब करती हैं ? सुधा ने हम्म्म कहकर गर्दन को हिलाया।  अच्छा है बैंगलोर ने बहुत जल्दी तरक्की भी बहुत कर ली है। और आप रहती कहाँ हैं ? राकेश ने एक और सवाल पूछा। मैं ऑफिस के पास ही एक रूम लेकर रहती हूँ , आने जाने का समय भी बच जाता है। सुधा ने चाय का घूंट भरते हुए कहा। 

ये शादी आप किसी के दबाव में आकर तो नहीं कर रहीं हैं ,राकेश ने अपने हाथों को बांधते हुए कहा। जी मैं समझी नहीं , कैसा दबाव ? सुधा ने कहा। आप किसी और को पसंद करतीं हो और फॅमिली के दबाव में आकर शादी के लिए हाँ कर रहीं हो ? आप बाहर रहतीं हैं , अकेली रहतीं हैं और आजकल लड़कियां लिव इन और अफेयर्स को लेकर उतना सोचतीं नहीं , कही आपका कोई ? राकेश ने थोड़ा और साफ़ साफ़ पूछा।  हाहाहाहा जी बिल्कुल भी नहीं, मेरे घर में बचपन से हर बात शेयर करने का रिवाज़ है , हम एक दूसरे के दोस्त जैसे हैं बिल्कुल।  ऐसा कुछ भी नहीं। सुधा ने अपने हाथों में पहनी गुलाबी चूड़ियां पर हाथ फेरते हुए कहा। 

ये तो बहुत अच्छी बात है हर बात खुल कर ही कहनी चाहिए , परिवार में , दोस्तों से और जीवनसाथी से।आप कुछ पूछना चाहती हैं तो पूछ सकतीं हैं , राकेश ने कहा।आपकी गर्ल फ्रेंड है क्या राकेश ? राकेश ने मुस्कराते हुए कहा हाँ मेरी GIRLFRIEND नहीं GIRLFRIENDS  रही हैं।  राकेश के चेहरे पर ये बताते हुए बहुत ही गर्व था। nice nice , तो फिर किसी से शादी कर पाएं ऐसी कोई नहीं मिली ?  सुधा ने सवाल किया। girlfriend घर नहीं चला सकती , बीवी चला सकती है , हाहाहाहाहा राकेश की हंसी सुधा को अब चुभने लगी थी। मन ही मन सोच रही थी " कैसी सोच है ये , girlfriend घर नहीं चला सकती ! 

सुधा ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा मतलब ? मतलब ये की मज़ा मस्ती अपनी जगह शादी के लिए तो घर वाले ढूंढें वही बेहतर है। हम्म्म। अच्छा। तो आप वर्जिन हैं ? सुधा का ये सवाल सुनकर , राकेश कमरे से उठकर चलने लगा।  ओह्ह सो सॉरी मैंने कुछ गलत पूछ लिया क्या  राकेश ? सुधा ने कहा। नहीं नहीं मगर ऐसा सवाल कौन पूछता है , बताया तो girlfriend थी , कभी कबार मौज मस्ती चलती रहती थी , मगर मैं सीरियस नहीं था। ठीक है शायद अब हमारी बातें पूरी हो चुकी है , सब बाहर इंतज़ार कर रहे होंगे। राकेश ने कुर्सी से उठते हुए कहा।  जी बिल्कुल , सुधा ने हामी भरी। 

हम आपको फ़ोन करते है घर पहुंचकर , बहुत अच्छा लगा आपसे मिलकर श्यामानन्द जी ने दुबे जी से कहते हुए विदा ली। दो तीन दिन तक जवाब ना पर दुबे जी ने सोचा यूँही खैरियत पूछने को एक फ़ोन ही कर ले श्यामानन्द जी को। श्यामानंद जी ने फ़ोन उठाया और हाल चाल पूछा। हम आपके फ़ोन का इंतज़ार कर रहे थे श्यामानन्द जी , दुबे जी ने हल्के फुल्के शब्दों में पूछा। भाईसाहब मैं बस आपको एक सलाह देना चाहूँगा की हमे अपने घर के लिए एक सीधी साधी बिल्कुल हमारे जैसे साधारण सी लड़की चाहिए। लड़कियां आजकल पढ़ लिख जाती हैं , नौकरी भी करती हैं पर उन्हें अपने बात करने का लहज़ा थोड़ा संभालना चाहिए। ये रिश्ता नहीं हो पायेगा , राकेश को सुधा के पूछे गए सवाल अच्छे नहीं लगे। कहते हुए श्यामानन्द जी ने फ़ोन रख दिया। 

सुधा ने तो ऐसा कुछ नहीं बताया , दुबे जी यही सोच रहे थे।  आज तक कभी ऐसी कोई बात  भी नहीं करती की किसी का दिल दुःख जाए। सुधा के कान  तक भी ये बात अब पहुंच चुकी। और वो समाज में फैले इस मानसिक असतुंलन पर हंस रही थी।  लड़की देखने आये लड़के के माता पिता और लड़का जो मर्ज़ी आये पूछ सकतें हैं , लड़की या लड़की के परिवार वाले कोई निजी सवाल पूँछ लें तो इतना क्यों आन बान शान पर आ जाता है ?

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