मुझे हक है- Blog post by Mamta Jain

मुझे हक है- Blog post by Mamta Jain

यदि भारतीय संविधान ने लिंग भेद किए बिना सभी को समान मौलिक अधिकार प्रदान किए है तो यह एक निरर्थक प्रश्न ही है कि महिलाओं को समान हक मिले।हमारे संविधान में तो पहला मौलिक अधिकार ही समानता का अधिकार है।जिसके अनुसार लिंग, जाति, जन्मस्थान,धर्म,वंश,के आधार पर कोई भेदभाव नही किया जा सकता है।साथ ही रोजगार के संबंध में समान अवसर और वेतन भी शामिल है।


कहने का तात्पर्य हमे अधिकार तो मिले है लेकिन या तो हम अनजान हैं या हमे जानने नहीं दिया गया।क्योंकि पुरुषसत्ता वाले हमारे समाजों में स्त्री शक्ति से कोई अनजान नहीं,सिर्फ कुछेक स्त्रियां और अपवाद छोड़ दे दिए जाएं तो।थोड़ी सी और जागरूकता की जरूरत है फिर कायाकल्प जो होगा वो देखने लायक होगा।यही वास्तविकता है।


हां वैश्विक स्तर पर कहीं कहीं महिला समानता पर सच्चाई दोगली हो सकती है।जैसे मौजूदा अफगानिस्तान की स्थिति।किंतु भारतीय परिप्रेक्ष्य में निरंतर सुधार हुए हैं।


वोट देने से लेकर,शिक्षा,तकनीक,विज्ञान,अंतरिक्ष,सेना,लोकसेवा,राजनीति,धार्मिक या सामाजिक हर स्तर पर महिलाएं प्रगतिशील है ।कहीं आगे बढ़ चुकी हैं।तीन तलाक से मुक्त समाज का निर्माण जारी है।वहीं बेटियों को भी पिता की संपत्ति में हकदार मान लिया गया है।महिला की किसी पुरुष से कोई प्रतिस्पर्धा नहीं होती बल्कि रूढ़िवाद और स्वयं पर विजय प्राप्त कर स्वयं के लिए सम्माननीय स्थान अर्जित करना अत्यावश्यक है।


हां कहीं कहीं अपवाद स्वरूप बलात्कार,एसिड अटैक,भ्रूण हत्याएं जैसी घटनाएं व्यथित करती है।लेकिन उसके लिए कठोर कानून हो,साथ ही महिलाओं को खुलकर ,निर्भय होकर आगे आना होगा।अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद को ही लेनी होगी।।स्वयं को आर्थिक स्वावलंबी बनाना होगा।


अशिक्षा,गरीबी जैसे अभिशापो से मुक्ति दिलाने के लिए सरकारी प्रयास निचले स्तर से ही जरूरी है।क्योंकि भ्रष्टाचार के चलते यही से अपराध और शोषण प्रारंभ होते है।महिलाएं स्वयं अपने अधिकारों का दुरुपयोग न करे।


पिंक मंच से महिलाओं के सहयोग हेतु हर भारतीय का आह्वान करती हूं की मिलकर आगे आए,हाथ बढ़ाएं,हिम्मत बने,तभी सार्थक समानता मिल पाएगी।

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