मिली जीवन की सबसे बड़ी खुशी#मां होने पर गर्व

मिली जीवन की सबसे बड़ी खुशी#मां होने पर गर्व

"तुम्हारी रिपोर्ट्स को देखकर लगता है कि तुम्हें मां बनने में परेशानी होगी। फिर भी कोशिश तो करेंगे ही"- डॉक्टर की बात सुनते ही मुझे लगा जैसे किसी ने गरमा गरम सीसा कानों में उड़ेल दिया हो। दो मिनट तो स्तब्ध सी बैठी रह गई, आंखें भर आई।‌

हमारी शादी को 3-4 साल हो चुके थे पर अभी तक घर में कोई किलकारी गूंजी नहीं थी। मुझे बच्चों से शुरू से ही बहुत प्यार रहा है पर घर में जिम्मेदारियां बहुत थी।‌ जब जिम्मेदारियां कम हुई तब पता चला कि शायद मेरे लिए मां बनना आसान नहीं होगा। मेरी शादी के बाद मेरी ननंद,‌ बहन और भाईयों की शादी हुई और उनके आंगन में पहले ही फूल खिल गए थे। ढेर सारी खुशियां तो थी पर साथ ही मन थोड़ा उदास भी था। पर विश्वास भी अटूट था कि देर से ही सही हमारे आंगन में भी बहार आएगी। ‌

हम दोनों उदास मन से डॉक्टर के केबिन से बाहर आ गए। बहुत देर तक किसी ने कुछ भी नहीं कहा फिर इन्होंने ही चुप्पी तोड़ी- "डॉक्टर ने मुश्किल कहा है नामुमकिन नहीं।‌"

बस समय बीतता रहा। हर महीना एक नई आशा एक उम्मीद के साथ और फिर वही निराशा।साल 1999 की शुरुआत हुई ही थी। एक दिन बहुत से मेहमान आए हुए थे। घर में बहुत से काम थे पर सुबह बिस्तर से उठते ही नहीं बन रहा था। सुबह सुबह जी भी बहुत मिचला रहा था। पर उसे मैंने खाने पीने में हुई गड़बड़ी मान लिया। ये उसके आने की पहली आहट थी पर मुझे समझ ही नहीं आया।‌ हां कुछ बेचैनी सी, कुछ घबराहट सी हर पल मुझको महसूस होती थी। पर डॉक्टर के कहने के अनुसार चूंकि मां बनने की उम्मीद बहुत कम थी इसलिए उस ओर ध्यान ही नहीं गया।

मुझे समझ में नहीं आया कि क्या हो रहा है।‌ पहले लगा कि शायद कुछ उल्टा सीधा खा लिया है पर अब तो यह नित्यक्रम हो गया था। मेरे पीरियड्स भी लगभग डेढ़ महीने मिस हो गए थे जो व्यस्तता में मुझे याद ही नहीं रहा। पर अब मुझे कुछ उम्मीद भी जगने लगी थी। जब डॉक्टर को दिखाया तब उन्होंने पहले तो इस उम्मीद को सिरे से नकार दिया पर आग्रह करने के बाद यूरिन टेस्ट किया जिसका परिणाम मेरी उम्मीद को बल देता था।‌ फिर सोनोग्राफी की और सुखद आश्चर्य के बीच उन्होंने मुझे मां बनने की बधाई दी। पहले तो मुझे विश्वास ही नहीं हुआ फिर उन्होंने मॉनिटर पर जब इमेज दिखा कर समझाना शुरू किया तब मैंने अपने अंदर जो महसूस किया उस एहसास का वर्णन किया ही नहीं जा सकता। मेरा रोम-रोम रोमांचित हो उठा। मेरी आंखों से आंसू बह निकले पर होठों पे मुस्कान थी और मेरी यह अवस्था देखकर मेरे पति ने हौले से मेरा हाथ दबा दिया जैसे कह रहे हों कि देख अब अपने घर भी खुशियों ने दस्तक दे ही दी।

मेरे लिए अब हर पल हर क्षण अब एक नया जीवन था। स्टेथोस्कोप से उसके दिल की धड़कन सुनकर मेरा मन नाचने लगा। धीरे-धीरे जैसे-जैसे उसने अपना रूप बढ़ाया मेरी अधीरता बढ़ने लगी। हमेशा ही मुझे बेटी की चाहत थी। मैं रोज ईश्वर से प्रार्थना करती थी कि मुझे एक प्यारी सी बिटिया दें। जब पहली बार उसने अंदर से मुझे लात मारी तब मैं रात भर खुशी के मारे सो ही नहीं पाई। मैं जब-जब भगवान के सामने पाठ करने बैठती तब-तब वह तेजी से अंदर घूमने लगती थी। हम दोनों जब भी उसको ऊपर से छूकर उससे बातें करते थे तब उसकी हलचल से हमें लगता था जैसे वह हमारी सारी बातें समझ रही हो। उसके इंतजार में मैंने वो नौ महीने कैसे बिताए होंगे आप समझ ही सकते हैं। जैसे-जैसे उसके आने के दिन पास आ रहे थे वैसे-वैसे रोमांच के साथ हमारी उत्सुकता बढ़ती ही जा रही थी। आखिर मेरी बेटी के जन्म का बहुप्रतीक्षित दिन आ ही गया।

उसके नन्हे-नन्हे हाथों का स्पर्श मुझे ऐसा लगा जैसे मैंने मखमल को छू लिया और उसके रुदन से जैसे मेरे कानों में सैकड़ों मधुर घंटियां सी बजने लगी थी। उसे मैंने जोर से अपने सीने से चिपका लिया, उस समय पहली बार मातृत्व का जो अहसास था वो शब्दों में बयां नहीं कर सकती।

सूने से मेरे घर-आंगन को अपनी किलकारियों से गुंजायमान करने, मेरे जीवन को महकाने और मुझे मां बनने का गौरव देने के लिए मेरी बेटी ने इस दुनिया में अपना पहला कदम रख दिया था।

प्रीति अग्रवाल

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