मन की बात 2020 तुम्हारे साथ

मन की बात 2020 तुम्हारे साथ

प्रिय 2020

दिसम्बर माह चल रहा है दिन गुजरते जा रहे हैं तुम्हारी विदाई बहुत नजदीक है। आज सच में तुमसे बहुत कुछ कहने को जी चाह रहा है। पिछली साल जब यही महीना था हम सब का उत्साह देखते ही बन रहा था। 31दिसम्बर2019 की रात बारह बजे से वक्त दिन तारीख सब बदल जायेंगे।नया सवेरा, नया साल ,खुद से नये वादे नयी राहें।बच्चे , बड़े, युवा वर्ग, विद्यार्थी  सबके 2020 के लिये नये अरमान नये सपने। हम सभी ने तुम्हारा बहुत स्वागत किया पर,,,,,,,,पर ,,, मार्च  के अन्त तक सब तुम्हे कोसने लग गये।मैं भी ! एक वायरस ! हर तरफ हाहाकार,बंदिशे,डर, मायूसी , चिन्ता और प्रार्थना ।आम इंसान से लेकर नेता अभिनेता, बड़े बड़े उद्यमी , मज़दूर ,वर्कर सब जैसे आसमां से जमीं पर आ गिरे। 
लेकिन ,,,,लेकिन इन सबके बावजूद तुम मुझे ईश्वर का पृथ्वीवासियों को एक संदेश लगे। कैसे ,,,,,,! तुम्हारा आश्चर्य मैं अभी दूर करती हूँ। तुम्हे तो पता ही है लॉकडाउन  लगा।पर नही बंद हुई  राशन, दूध और मेडीकल की दुकानें ! समय निश्चित था बंद करने और खोलने का ।मेरा डर भी चरम पर था क्योंकि मेडीकल की शॉप और पतिदेव और स्टॉफ का लगातार कस्टमर को अटैंड करना। हर समय डर लगा रहता पर मुझे हौसला दिया मेरी शॉप के स्टॉफ ने कि हम "सर" को आगे नही आने देंगे।हम और सर  ग्लवस और मॉस्क पहनेंगे और गर्म पानी बराबर पीते रहेंगे आप बिल्कुल चिंता न करें तब मुझे एहसास हुआ कि वाकई एक मजबूत रिश्ता होता है आपके और आपके साथ काम करने वालों के बीच !
जिन घरों में अलग अलग रसोई थीं वह भी हफ्ते में एक बार मिल बाँट के नई नई डिश बनाने लगे ।परिवार इकट्ठे बैठकर खाने पीने लगा क्योंकि बाहर सब बन्द था।बर्थडे,एनीवर्सरी सब घर पर सेलीब्रेट होने लगा।तेज़ भागती जिंदगी की रफ्तार कुछ थमी।अपनों को अपनों का साथ मिला। बहुत कुछ हुआ, ,,,  कुछ का साथ छूट गया। कुछ का काम रुक गया पर नही रुका जीवन और जीवन को जिंदादिली से जीने का हौसला।
शुक्रिया 2020 मुझे, हमें जीवन हर हाल में जीने का सबक सिखाने के लिये धैर्य,बुद्धिमत्ता,सुलझी हुई दिचर्या और दूर रहकर भी आपसी सहयोग की महत्ता बताने के लिये। 
सारिका रस्तोगी 
अम्बाला कैंट

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