मनोबल हिंदी कहानी

मनोबल  हिंदी कहानी

संजना ये लो लड़के की तस्वीर देख लो और बताओ कि तुम्हें पसंद है या नहीं... नकुल ने जब ये बात संजना से कही तो संजना शरमाते हुए कमरे में चली गई।


वहीं बैठी उनकी मां सुनीता जी की आंखें भर आईं। नकुल ने मां के आंसू भरे आंख देखकर कहा... मां अब तो खुश हो जाओ, हम जो चाहते थे आखिर वो हो गया।

अब देखना मां संजना की शादी ऐसे धूम धाम से करूंगा कि सब देखते रह जाएंगे।


लेकिन बेटा पहले लड़के वाले संजना को तो पसंद कर लें! मां सुनीता ने कहा....


अरे मां फोटो देखकर तो हां कर ही दिया है ना उन्होंने ,तभी तो लड़के की तस्वीर मेरे साथ भेजी है‌।

नकुल ने कहा...

वो तो ठीक है बेटा पर जब तक शादी तय ना हो जाए तब तक कुछ कहना मुश्किल है‌।

अच्छा छोड़ो इन बातों को अगले सप्ताह लड़के वाले आ रहे हैं तभी सबकुछ अच्छे से समझ आएगा कि आगे क्या करना है।


मां सुनींता बेटी के दबे हुए रंग से परेशान थी, क्योंकि बेटी का दबा हुआ रंग ही विवाह में देरी का कारण बन रहा था।

वैसी संजना बहुत ही समझदार और व्यवहारिक लड़की थी ,पर आज के ज़माने में लोग लड़की का रंग रूप पहले देखते हैं और स्वाभाव बाद में।


संजना अपने उसी दबे रंग और विवाह ठीक ना होने के कारण मोहल्ले वालों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई थी। हर दिन कोई ना कोई सलाह देने आ जाता जैसे इतना पैसा तो हैआपके पास फेस ट्रीटमेंट करा लो रंग निखर जाएगा, अरे अपने से नीचे घराने में कर दो जल्दी शादी हो जाएगी और तो और किसी गरीब से शादी कर के लड़के को घर जमाई बना लो। लोगों के मुंह से ऐसे - ऐसे सलाह सुनकर उन लोगों  का मन दुःखी हो जाता।


मोहल्ले वालों की बात सुनकर सुनीता जी और संजना दोनों परेशान रहती और अंदर ही अंदर घुटती रहती। दबे रंग के कारण लड़के वालों का बार बार इंकार करना संजना को तोड़ने लगा था पर इसी बीच आशीष से संजना की शादी की बात चली थी।


आशीष का पढ़ा लिखा परिवार भी इस दर्द से गुजर चुका था। अपनी बहन की शादी के दौरान आशीष ने नकुल से भी ज्यादा रिश्ते ढूंढे थे पर उसके बहन के दबे रंग के कारण उसे भी यही दिन देखना पड़ा था जिससे आज नकुल गुज़र रहा था।


आज वो दिन भी आ गया जब आशीष के परिवार वाले संजना को देखने आ रहे थे।वे लोग संजना को पसन्द कर  बहू के रूप में स्वीकार करने के लिए तैयार हो गए और कहा लड़की हमेशा सूरत देखकर नहीं बल्कि सीरत देखकर भी पसंद करनी चाहिए।


आशीष के परिवार वालों के मुंह से ये बात सुनकर संजना खुद को खुशकिस्मत मान रही थी और सुनीता जी बेटी को खुश देखकर खुश हो रही थी।


आज भी हमारे समाज मैं लड़की का विवाह समय पर ठीक ना होने कारण लोग तरह तरह की बातें बनाते हैं जिसके कारण लड़की और उसके परिवार का मनोबल टूट जाता है।


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