मेरी माँ

माँ ही खुदा है मेरी

माँ ही पूजा है मेरी,

माँ अनमोल उपहार,

माँ से जिंदगी है मेरी। 


माँ शब्द को क्या परिभाषित करूँ, जो बच्चों के सारे गम सह लेती है, कभी ना कोई चाहत रखती है, बस देती रहती हैं। कभी उसका दामन छोटा नहीं होता है। 


आज से बाईस वर्ष पूर्व की बात हैं। मै अस्पताल में भर्ती थीं। मेरा बेटा वक़्त से कुछ पहले हो गया था। काफी समस्या भी आ रही थी। उल्टा हुआ था, तो उसके पेट में ख़ून रह गया था ।डाक्टर को पता ही नही चला। मेरे पास सो रहा था। मुँह से खून निकला तो मा ँ माँ घबरा गयी। डाक्टर के पास दौडी दौडी ग ई।बोली डाक्टर साहब मेरे बच्चे को बचा लीजिये। 


डाक्टर साहब बोले घबराईयै मत बहन जी ,बच्चा ठीक हो जायेगा। फिर उसे पीलिया हो गया ।आठ तक दिन तक फोटोथेरेपी हुई। काँच की पेटी में रखा। मेरी माँ रात दिन उसकी सेवा में लगी रही। ना खाने की सुध ना सोने की सुध। पम्प से दूदूध निकाल कर मै देती और वो उसे वहां जाकर पिलाती। ड्रीप चढ रही थी तो पूरी रात हाथ पकड़ कर मेरे बेटै का बैठी रहतीं। 


एक दिन तो डाक्टर साहब ने भी बोल दिया, आप क्या लगती हैं इस बच्चे की, रात दिन खुद को भूलकर इतना ध्यान रखना। माँ बोली मैं नानी हूँ इसकी। और ऑखों से ऑंसू उनके गिरने लगे। अमानत है ये मेरी बेटी की।डाक्टर साहब बोले आप बहन जी बहुत ग्रेट हो। सही है माँ की बराबरी कोई नहीं कर सकता है। वह एक फरिश्ता है जिस को भगवान हम बच्चों के लिये धरती पर भेजत हैं। 


माँ का रिश्ता ऐसा ही होता है। सारा दर्द भूल जाती है अपने बच्चों के खातिर। बस.....वृक्ष की तरह होती है जिसकी छाँव में हम सभी महफ़ूज रहते हैं। ।


#मेरी माँ 

डा राजमती पोखरना सुराना भीलवाड़ा राजस्थान से

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