मेरी मां सब जानती हैं

फोन पर मम्मी की आवाज सुनते ही अपनी आवाज को यथासंभव सामान्य बनाते हुए रीना ने पूछा -"हैलो मम्मी कैसी हो"

"मैं तो बिल्कुल बढ़िया हूं तू सुना"

"सब एक दम मजे में हैं। मैं थोड़ी देर बाद कॉल करूं अभी जरा किचन में व्यस्त हूं"- रीना ने बहाना बनाया।

"हां बेटा अपना काम निपटा ले पहले"- कहते हुए मम्मी ने फोन रख दिया।


रीना के आंसू बह निकले। "कितनी मुश्किल से मम्मी के सामने अपने पर नियंत्रण रखा। वो खुद ही अभी बीमार चल रही हैं उन्हें कैसे बताऊं कि अभी बहुत परेशान हूं बहुत ज्यादा सावधानी रखने पर भी पलक को दुबारा कोरोना हो गया"

थोड़ी देर में मम्मी का फिर फोन आ गया।

"बेटा फ्री हो गई"

"हां मम्मी बोलिए ना"


मम्मी ने अपनी इधर उधर की बातें शुरू कर दीं। वो सब सुनने का अभी उसका बिल्कुल मूड नहीं था पर मम्मी को कैसे कहे? उन्हें तो पलक के बारे में बिल्कुल पता नहीं चलना चाहिए। इसी तरह रोज उनके फोन आते और कभी वॉट्सएप के पुराने घिसे पिटे जोक्स और कभी पेपर में आए चुटकुले सुनाती। खुद इतना जोर से हंसती कि रीना को भी उनके साथ जबरदस्ती हंसना पड़ता। पर सच में उस समय वो अपनी तकलीफ भूल जाती। अब अक्सर वो ऐसे समय फोन करतीं जब रीना काम से फ्री हो चुकी हो। उस समय रीना का मन बस थोड़ा आराम करने को करता पर मम्मी उसे कम से कम एक घंटे तक अपनी बातों में उलझाए रखती फिर कहती कि मुझे नींद आ रही है तू भी आराम कर ले और रीना भी कुछ समय के लिए आराम से सो जाती।


आज फिर मम्मी का फोन आया और बोलीं -"क्या हाल हैं? पलक का क्वारांटाइन समय भी पूरा हो गया" "नहीं नहीं मम्मी किस बात का क्वारंटाइन? वो तो बिल्कुल ठीक है" रीना ने हड़बड़ाते हुए कहा।


"बेटा किससे छुपा रही है तू। तेरी मां हूं। नौ महीने अपनी कोख में रखा है तुझे। मैं तेरे हर एक मूड को, हर एक परेशानी को बखूबी समझती हूं। पहले ही दिन तेरी उदास आवाज से मुझे समझ में आ गया था कि कुछ तो गड़बड़ है। " मुझे तो जरा भी अंदेशा नहीं हुआ कि आपको सब मालूम है"


"बेटा याद कर रोज मेरे फ़ालतू के जोक्स और उसपर जोर जोर से हंसना, काम से थकी होने के बाद भी तुझे लेटने नहीं देना क्योंकि मुझे मालूम था कि लेटते ही तू चिंता में डूब जाएगी सोएगी नहीं, इसीलिए तुझसे इधर उधर की बातें करके तेरा ध्यान पलक की चिंता से हटा देती थी…\"


"और फिर मैं अच्छे से सो जाती थी। मम्मी तुम्हें सब कैसे पता चल जाता है?""जैसे तुझे अब पलक का हर एक सुख, दुख, चिंता, परेशानी पता चल जाती है बस वैसे ही""सॉरी मम्मी मैं आपसे छुपाना नहीं चाहती थी पर मुझे लगा…"

"तुझे लगा कि मैं और ज्यादा चिंता में पड़ जाऊंगी पर बेटा मां कभी कमजोर नहीं होती। मैं तो रोज भगवान से तुम सभी के लिए प्रार्थना करती हूं ताकि तुम सब खुश रहो। अब तू बिल्कुल चिंता मत कर, कष्ट भरे दिन बीत गए पर अभी भी पूरी सावधानी रखना"


"हां मम्मी जो आज्ञा। पर अब आज अपने वो घिसे पिटे जोक्स नहीं सुनाओगी""ना बाबा मुझसे ही नहीं झेले जाते वो तो, कैसे झेले हैं मैंने वो इतने दिन मैं ही जानती हूं"


"और मैं भी मम्मी"और दोनों मां बेटी खिलखिलाकर हंस पड़ीं।


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