मेरी पहली अकेली रेलयात्रा #मजेदार रेल यात्रा #7दिन7ब्लाॅग

मेरी पहली अकेली रेलयात्रा #मजेदार रेल यात्रा #7दिन7ब्लाॅग

पहली बार अकेले सफर करना और वो भी पूरे तीस घंटों का! है ना रोमांचक? आइए आपको अपनी पहली अकेली रेलयात्रा के बारे में बताती हूॅ॑।


मैं बी एस सी के बाद डाइटीशियन का कोर्स करने अपने पापा के साथ ऑल इण्डिया इंस्टीट्यूट ऑफ हाइजीन एंड पब्लिक हेल्थ, कलकत्ता गई। दो महीने बाद मेरा एम सी ए की प्रवेश परीक्षा थी जिसके लिए पापा ने ट्रेन में रिजर्वेशन करा दिया और वो मुझे वहां छोड़कर लौट आए।


दो महीने वहां पढ़ी और साथ ही एम सी ए की प्रवेश परीक्षा की तैयारी भी करती रही। हाॅस्टल बहुत बढ़िया था और बहुत स्टूडेंट्स रहते थे। मुझे याद है कि जिस दिन मुझे कलकत्ता से रामपुर जाना था , वो अगस्त का महीना था। घनघोर बारिश हो रही थी। सड़कों पर घुटनों तक पानी भरा हुआ था। ऐसे में मेरे कुछ साथी माने नहीं और वो मुझे टैक्सी से रेलवे स्टेशन तक छोड़ने आए।


हाॅस्टल में एक बाॅण्ड सा बन जाता है। हाॅस्टल से जा रही थी, शाम ७बजकर २०मिनट की ट्रेन थी, मेरे साथियों ने इतना बड़ा मेस होने के बाद भी कैसे न कैसे करके मेरे लिए दो समय का खाना पैक करवाया और मुझे दिया।


मैं अपनी आरक्षित सीट पर बैठी। पानी-खाना साथ था मेरे, रात को खाना खाकर सो गई। एम सी ए की प्रवेश परीक्षा देने जा रही थी तो दिन में पढ़ती रही, कभी थोड़ा बहुत सोई भी। सहयात्री सभी ठीक थे, आरक्षित कूपा था तो सभी अपनी बर्थ पर आराम कर रहे थे, लम्बी दूरी में ज्यादातर लोगों का समय सोते हुए बीतता है।


बनारस होकर गाड़ी जाती थीं। वहां मेरी डॅाक्टर बुआ, जो बनारस में रहती हैं, मेरे लिए खाना-फल व मिठाई लेकर आई थीं। लोग अलग-अलग स्टेशनों पर चढ़ते उतरते रहे, सफर में आस पास के लोग भी ठीक थे। दो आंटियों को आश्चर्य भी हुआ कि मैं इतनी लम्बी यात्रा अकेले कर रही हूॅ॑। मैं बचपन से ही निडर और निर्भीक थी तभी मेरे पापा को मैंने इतनी दूरी अकेले तय करने के लिए राजी कर लिया था।


रात तक ट्रेन रामपुर पहुॅ॑ची। इस तरह पूरे तीस घंटों का सफर मैंने अकेले तय किया।रामपुर में पापा ने मुझे ट्रेन से उतार लिया। थोड़े चिंतित थे , पूछा सफर कैसा रहा? सहयात्री अच्छे तो थे ना? बनारस स्टेशन पर बुआ ने मिलने के बाद पापा को फोन कर दिया था तो उन्हें संतोष था कि बेटी भूखी नहीं रही।


और फिर क्या था मेरे सफर के किस्से शुरू हो गए जो घर में पहुंच कर मैंने बाबा-दादी से‌ लेकर मम्मी, भाई-बहन सबको बताया।


दोस्तों, कैसा लगा आपको मेरा पहला अकेला सफर? वो भी पूरे तीस घंटों का! यदि मेरी यह सच्ची कहानी आपको अच्छी लगी हो तो लाइक, शेयर और कमेंट करें। ऐसी ही अन्य रचनाओं के लिए मुझे फाॅलो करना न भूलें।


धन्यवाद।

-प्रियंका सक्सेना

(मौलिक व स्वरचित)


#मजेदार रेल यात्रा

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