#मेरा पहला प्यार (world poetry day)

#मेरा पहला प्यार  (world poetry day)



पहला प्यार


सच कहा किसी ने पहला प्यार कभी भूलाया नहीं जा सकता,
हो जाए चाहे दूबारा प्यार मगर दिल से पहले प्यार की याद को मिटाया नहीं जा सकता।

कालिज का वो पहला दिन, जब अचानक से वो मुझ से टकराई थी,
छूट गई थी हाथ से किताबें उसकी, और वो मुस्करा कर के शरमाई थी।

जैसे ही लड़खड़ा के वो मेरी बाहों में आ गई, मै भी तो
कुछ घबराया था, वो भी कुछ घबराई थी, थाम के उसे
बाँहो में अपनी , इक पल के लिए हड़बड़ाया था।

ना जाने कैसी शरारत की उसके नयनों ने, डूब गया
था उनमें मैं , बिन मय पीये ही मदहोशी छाई थी ।
निढाल सी पड़ी थी वो बाँहों में मेरी , लब उसके थे
काँप रहे, जैसे दो प्याले मय के लबालब भरे छलक रहे।

साँसो से साँसे टकराती हुई हमें इक नया मँज़र थी दिखला रही,
ना थी वो होश में ,ना था मैं होश में ,क्या यही होता है
पहली नज़र का प्यार ?

हां यही तो होता है पहली नज़र का पहला प्यार।


प्रेम बजाज ©®
जगाधरी ( यमुनानगर)

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