मेरी सहेली

मेरी सहेली

मेरी सहेली....

एक दिन मेरी सहेली मेरी उम्र के साथ बहस छिड़ गई....

 मैंने उससे कहा तू इतनी भी जल्दी क्या चलती रहती है कुछ

 दिन रुक रुक कर नहीं चलती....

 तू बचपन से जवानी तक जवानी से बुढ़ापा बन जाती है

तू बिल्कुल भी नहीं सोचती हमारे दिल पर क्या गुजरती है

उम्र मेरी सहेली तू इतनी जल्दी क्यों गुजरती है....

.तुम जवानी में कुछ दिन रुक जाओ तो क्या हो जाएगा....

 वह हंसकर कहती है यार मैंने तो तुम्हें बहुत वक्त दिया था

पर तुमने मेरी कद्र ही नहीं की इसलिए मैं तुम्हारे पास होकर गुजर गई.........!!!!!!!!

 तो तू ना रूकती है ना ठहरे दिया है बस आगे चलती ही रहती है

जैसे मुट्ठी में रेत की तरह फिर चलती रहती है

सोचने का मौका भी नहीं देती है और जिंदगी 

 वह हंसकर कहती है तूने मुझे मुड़ कर पीछे देखा ही नहीं

मैं आगे बढ़ती चली गई तेरे पास होकर गुजर गई जिंदगी मेरी सहेली 

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