मेरा शहर मेरी यादे

मेरा शहर मेरी यादे

# मेरे शहर से जुड़ी यादें 

महोबा शहर से मेरी कई खट्टी- मीठी यादें जुड़ी हैं। 

उस शहर मे रह के मैने अपनी पढ़ाई पूरी की है। 

वहां कई सहेलिया बनी। जिनके साथ मेरी  बहुत सी यादें 

है।हम सब सहेलिया मिल के कालेज जाते थे।उन सहेलियों में कोई खास सहेली है।जिससे हमारी बहुत बनती है। उसे डियर कहते थे। हम सब लोग में टयूशन क्लास जाते थे।वो सहेली आज भी दिल के बहुत करीब है। 

हम सब मिलकर टयूशन जाते थे। 

सारी सहेलिया दिल के बहुत करीब है।साथ सबके बताशे खाना। जब कालेज जाते और मीरा मैम की क्लास में  देर हो जाये वो हमेशा क्लास से बाहर कर दिया जाता था।

मीरा मैम हमे इतिहास पढ़ाती थी।

मुझे आज भी याद है जब मेरा प्रवेश पत्र खो गया था।ये घटना मुझे आजीवन याद रहेगी ।जब  कालेज के बाबू ने कहा तीन दिन बाद ही मिलेगा,तीसरे दिन मेरा पेपर था।छेदालाल बाबू थोड़े गरम स्वभाव के थे।पर हम कहा कम थे । हम सीधा अपने प्रिंसिपल के पास पहुंचे। उन्होंने बाबू को बुलाया प्रवेश पत्र दिलाया ।तब कही जान मे जान आयी।

पहली बार  मैने साइकिल चलाना सीखा। सुबह साइकिल सीखने जाते।पहले मन में डर था कैसे सीखेगें पर सीख गये।सारी सहेलियां साइकिल से ही कालेज जाते थे।कई बार साइकिल चलाते  वक्त मौत से भी सामना हुआ पर बच गये। 

शिवरात्रि मे सब लोग बलखंडेशवर मन्दिर जाते थे।जो ऊंचे पहाड़ पर है ।जहां शिवरात्रि मे बहुत भीड़ होती है।

नवरात्रि में बड़ी चन्द्रिका मन्दिर पूजा करने जाते थे।सुना है आल्हा आज भी वहा पूजा करने आते है। बड़ी चन्द्रिका देवी की मूर्ति पहाड़ की चट्टान मे बनी है।

सहेलियों की बहुत याद आती है।पढ़ाई पूरी होने के बाद सब अलग- अलग हो गये।कोई आगे की तैयारी करने लगा।और सहेलियों की शादी हो गयी। अब बस फोन से

बाते ही बात करते है। 

मेरी और dear की सबसे ज्यादा बनती थी। हम हमेशा साथ रहते थे ।आज भी उसकी याद आती है।हम दोनों साथ मे बाजार जाते थे। या पढ़ाई को लेकर कोई समस्या हो एक -दूसरे से साझा  करते थे ।ऐसा लगता है ये पल यही थम जाये।हम दोनों आज भी एक-दूसरे से जुड़े है।बस 

फर्क यह है पहले रोज साथ रहते थे। अब फोन से बात करते हैं। 

#मेराशहरमेरीयादे

#दपिंककामरेड 

Nandini…..✍✍

स्वरचित 

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