मेरे सपने मेरे अपने

मेरे सपने मेरे अपने

फैमिली कोर्ट के परिसर में चाय के स्टॉल की बेंच में बैठी , कोयल कुछ कागज उलट-पुलट करते  बीच-बीच में चाय की चुस्की भी ले रही थी, उस लड़की के चेहरे पर आत्मविश्वास की ऐसी चमक थी ,मानो एक लंबी लड़ाई के बाद उसे विजय मिली हो। सारे कागजात फाइल में लगाकर फाइल बंद, कर चाय का कप पकड़े जैसे वह अतीत में चली गई हो।

मानो कल की ही तो बात थी एक सांवली सी लड़की कोयल,आंखों में लाखों सपने पिरोए अपने माता-पिता का नाम रोशन करने के लिए तत्पर रहने वाली और जिंदगी को अपनी पहली पसंद बना ,यूपीएससी की तैयारी में लगी थी, उसके माता-पिता उसकी इस इच्छा को पूरी करने में तत्पर रहते , कोयल के पिता का यह मानना था कि जिंदगी एक बार मिलती है, आपको जो जिंदगी से लेना है आप वह ले लीजिए। जिंदगी अपनी शर्तों के हिसाब से जीने वाला ही नए कीर्तिमान बना पाता है, दूसरों के दिखाए रास्ते में चलकर आप जिंदगी की खूबसूरती का अनुभव नहीं कर सकते।

जिंदगी की  असाधारण चुनौतियों व अनिश्चियताओ को वही हरा सकता है जो व्यक्ति अपनी स्वयं की बौद्धिकता का अनुसरण करें।
कोयल अपने पिता की यह बात सदा याद रखती  और अपने लक्ष्य को पाने में तत्पर रहती थी पर एक दिन एक फोन ने उसकी जिंदगी का रुख बदल दिया, उसे पता चला कि उसके माता-पिता का कार एक्सीडेंट हो गया है और उसके पिता का स्वर्गवास हो गया  तथा माता को भी गंभीर चोटें आई हैं।

पिता की दी हुई शिक्षा इस समय उसे इस विषम परिस्थिति में धैर्य बनाकर संयम से काम लेने के लिए विवश कर रही थी। उसकी माता हॉस्पिटल में जिंदगी और मौत से लड़ रही थी वहीं दूसरी तरफ वह अपने पिता का अंतिम संस्कार कर रही थी। कुछ समय बाद उसकी सेवा के करण कोयल की माता स्वस्थ होने लगी। अब रिश्तेदार कोयल की माता को ,कोयल की शादी कर जिम्मेदारियों से मुक्ति की सलाह देते रहते।

कोयल आगे  पढ़ना चाहती थी और यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण कर मजिस्ट्रेट बना उसका सपना था जो वह हर हाल में पूरा करना चाहती थी ,पर मां के दबाव  तथा पिता के जाने के बाद घर की माली हालत के कारण  कोयल को विवाह सूत्र में बंधना पड़ा। आए दिन कोयल को ससुराल वालों के तानें सुनने पड़ते ,कभी उसके रंग को लेकर तो कभी दहेज को लेकर।

उसकी सास ने उसकी सारी किताबें उठाकर कबाड़ी को बेच दी तथा उसे घर के कामों में ऐसा उलझाया कि उसे अपनी पढ़ाई के लिए समय ही नहीं मिल पाता था, शादी के एक साल के अंदर ही कोयल को एक बेटी हुई , जिसके कारण ससुराल वालों के ताने  और बढ़ गए,अब कोयल के पास अपने लिए भी टाइम नहीं होता था पूरा दिन उसका बच्ची को संभालने और घर के काम में चला जाता , कोयल ने कई बार अपने पति को बहुत प्यार से अपनी इच्छा बताई, लेकिन उसने कभी भी कोयल की मदद नहीं की।

कोयल ने नौकरी कर अपनी पढ़ाई को आगे जारी रखने का भी निवेदन किया लेकिन ससुराल वाले टस से मस नहीं हुए। अब कोयल के ऊपर अत्याचारों की सीमा पार होने लगी। अपनी जिंदगी को इस तरह से वह बर्बाद नहीं करना चाहती थी और ना ही अपनी बेटी की अबला मां बनना चाहती थी। वह अपनी जिंदगी को एक मुकाम देना चाहती थी और अपने पिता का नाम रोशन करने की उसकी इच्छा और प्रबल होती जा रही थी। उसने हिम्मत करके अपना ससुराल छोड़ दिया और तलाक की अर्जी लगा दी। साथ ही वह अपनी मां के ऊपर बोझ ना बने इसलिए एक प्राइवेट स्कूल में अध्यापिका के रूप में काम करने लगी, उसकी दृढ़ इच्छा को देखते हुए मां भी उसका पूरा सहयोग करती और उसकी हर संभव मदद करती।

अपनी नौकरी के साथ कोयल ने यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी फिर से शुरू कर दी, अब उसकी इच्छा शक्ति और भी प्रबल हो चुकी थी।नौकरी, अपनी तलाक का केस तथा साथ में परीक्षा की तैयारी वह सब एक साथ कर रही थी जो उसके व्यक्तित्व को और मजबूती प्रदान कर रहा था। आज उसको अपनी लड़ाई में पहली सफलता मिल चुकी थी आज उसके हाथ में तलाक के कागज आ चुके थे और वह आज अनचाहे रिश्ते से आज़ाद होकर, जिंदगी में अपनी इच्छा के रंग भरने के लिए स्वतंत्र थी।

चाय की प्याली की आखरी चुस्की लेते हुए उसने अपने अतीत को भी वहीं समाप्त कर दिया, और नई आशा के साथ वह अपने घर को निकल पड़ी।

 दिन-रात की मेहनत के बाद यूपीएससी की परीक्षा दी और जब उसका परिणाम आया तो वह बहुत अद्भुत रहा। कोयल ने अच्छी रैंक लेकर  यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की। कुछ सालों बाद   जब  उसनेअपने क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट के  रूप में कार्यभार संभाला तो सबसे पहले उसने अपने पिता को धन्यवाद किया ,जिन्होंने उसे'माय लाइफ माय चॉइस 'का मंत्र दिया था।

कोयल ने जिंदगी की अनिश्चियताओं के आगे घुटने नहीं टेके बल्कि जिंदगी की परिस्थितियों को अपने अनुकूल कर उसे अपने आगे झुकाया और जो वह जिंदगी से चाहती थी उसने उसे पाया । नारी सशक्तिकरण का एक प्रबल उदाहरण समाज के सामने प्रस्तुत किया। कोयल ने अपनी अथक परिश्रम से विषम परिस्थितियों को भी पीछे छोड़ दिया और जिंदगी से अपनी जिंदगी के सुनहरे पल ले लिए।
 

कोयल ने माय लाइफ माय चॉइस को केवल किताबी बातें ना समझ कर बल्कि उसे अपनी जिंदगी का मंत्र बना लिया और इस मंत्र का अनुकरण करते हुए उसने अपने लक्ष्य को पा लिया और उसे कम आंकने वालों का मुंह सदैव के लिए बंद कर दिया, साथ ही अपनी बेटी तथा समाज की हर स्तर की महिलाओं के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया कि अगर आपमें प्रबल इच्छाशक्ति है, तो आप अपनी जिंदगी को अपने हिसाब से ढाल सकते हैं।।
 

#my Life my choice

What's Your Reaction?

like
2
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0